मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाओं के लिए एम्स को प्रदेश के गृह मंत्रालय से मिली मंजूरी
जरूरी सामान के खरीदने की चल रही प्रक्रिया, इस सप्ताह से शुरू हो जाएगी प्रक्रिया
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब पोस्टमार्टम सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने एम्स को इसके संचालन की अनुमति दे दी है। लाइसेंस मिलने के बाद एम्स अगले सप्ताह से विधिवत रूप से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस संबंध में संबंधित पुलिस थाने को सूचित किया जा रहा है।
एम्स प्रशासन के अनुसार, संस्थान में स्थापित पोस्टमार्टम हाउस अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। यहां 24 शवों के लिए वातानुकूलित कोल्ड रूम की व्यवस्था की गई है। वहीं मोर्चरी में भी 24 शव रखने की रैक तैयार की गई हैं। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग को इसके संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा कि एम्स के फॉरेंसिक विभाग की ओर से पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और पोस्टमार्टम से जुड़े कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे तकनीकी पहलुओं को बेहतर ढंग से समझ सकें। प्रशिक्षण के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्टों की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को सटीक साक्ष्य उपलब्ध कराना आसान हो सकेगा। अभी कुछ जरूरी सामान खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
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पढ़ाई और शोध में मिलेगी मदद
एम्स में पोस्टमार्टम सेवाएं शुरू होने से मेडिकल छात्रों को पढ़ाई और शोध में नई दिशा मिलेगी। एमबीबीएस और पीजी छात्र न केवल शव विच्छेदन की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष देख सकेंगे, बल्कि इससे संबंधित अनुसंधान कार्यों में भी शामिल हो सकेंगे। यह सुविधा छात्रों की व्यावहारिक शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगी।
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पुलिस और प्रशासन को मिलेगी बड़ी राहत
अब तक गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में पोस्टमार्टम की सुविधा केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही उपलब्ध थी। इससे समय पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में अक्सर देरी होती थी। अब एम्स में सेवा शुरू होने से पुलिस को त्वरित फॉरेंसिक सहयोग और रिपोर्ट्स प्राप्त होंगी, जिससे विवेचनाओं में गति आएगी।
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सरकार से अनुमति मिलने के बाद एम्स अब पोस्टमार्टम सेवाएं शुरू करने जा रहा है। यह न सिर्फ पुलिस प्रशासन के लिए मददगार होगा, बल्कि हमारे विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और अनुसंधान को भी मजबूती देगा।
- डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक