री परपज यूज्ड कुकिंग ऑयल (आरयूसीओ) के तहत दुकानों से होगी खरीदारी
बड़े होटलों, नमकीन फैक्टरियों से खरीदा जाएगा उपयोग हो चुका खाद्य तेल
गोरखपुर में हर दिन होटल-फैक्टरियों में यूज होता है करीब 50 हजार लीटर सरसों का तेल
गोरखपुर। खाने के सामान तलने के लिए इस्तेमाल होने वाला सरसों का तेल बार-बार गर्म करने से खराब हो जाता है। ऐसे तेल में तला हुआ सामान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। पहले दुकानदार इस तेल को फेंक देते थे लेकिन अब इसका उपयोग नया रूप ले चुका है। सरकार ने खराब तेल को बायो डीजल बनाने में मिलाने का निर्देश दिया है। इसके बाद से एजेंसियां इस तेल की खरीद शुरू कर चुकी हैं।
गोरखपुर में दिल्ली की एक एजेंसी नामित है। अनुमान है कि इस एजेंसी को हर दिन पांच हजार लीटर से अधिक खराब तेल गोरखपुर में ही मिल जाएगा। खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने री परपज यूज्ड कुकिंग ऑयल (आरयूसीओ) योजना के तहत उपयोग हो चुके तेल को इकट्ठा करने की व्यवस्था बनाई है। इसके अंतर्गत बड़े होटल, रेस्टोरेंट और नमकीन बनाने वाली फैक्टरियों से खराब तेल खरीदा जाएगा। गोरखपुर में हर दिन होटलों और फैक्टरियों में करीब 50 हजार लीटर सरसों का तेल उपयोग होता है, जिसमें से लगभग 10 फीसदी तेल उपयोग के बाद अनुपयोगी हो जाता है। दिल्ली की एक एजेंसी को गोरखपुर में खराब तेल खरीदने के लिए नामित किया गया है। एजेंसी की तरफ से यह तेल सीधे बायो डीजल बनाने वाली कंपनियों तक पहुंचाया जाएगा। इस तरह न केवल बेकार तेल का सही इस्तेमाल होगा बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बायो डीजल में मिलाए जाने से यह ईंधन अधिक टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी बनता है। दूसरी ओर दुकानदारों और फैक्टरी मालिकों को भी आर्थिक लाभ होगा, क्योंकि अब उन्हें खराब तेल फेंकना नहीं पड़ेगा बल्कि इसके बदले कुछ पैसा मिल जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल से बाजार में मिलावटी तेल के प्रचलन पर भी रोक लगेगी। अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग खराब तेल को पुनः बाजार में बेचने की कोशिश करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन अब जब इस तेल की नियमित खरीद होगी तो मिलावट की आशंका कम हो जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग जुटा रहा आंकड़े
खराब सरसों का तेल जिन संस्थानों से एकत्रित किया जाना है, उनका आंकड़ा जुटाया जा रहा है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को जिम्मेदारी मिली है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के जरिये ऐसे संस्थानों की सूची बनवाई जा रही है, जहां सरसों के तेल की खपत अधिक है। सबसे अधिक खपत नमकीन बनाने वाली फैक्टरियों में है।