खेवट में सह हिस्सेदार के रूप में दर्ज है पिपरिया में 217 एकड़ जमीन, बेतिया एस्टेट की कितनी, जांच शुरू
बिहार सरकार के प्रशासक ने जिला प्रशासन से किया दावा- जमींदारी उन्मूलन के बाद दर्ज हो गए काश्तकारों के नाम
वर्ष 2017-18 में सर्वे रिपाेर्ट में मिली थी 7.50 एकड़ जमीन, खतौनी में दर्ज हैं दूसरे लोगों के नाम
गोरखपुर। बेतिया एस्टेट की जमीनों की खोजबीन के बीच बड़ा मामला सामने आया है। महराजगंज के पुराने भूमि रिकॉर्ड ''''खेवट'''' से पता चला है कि 1952 में जमींदारी उन्मूलन प्रभावी रूप से लागू होने के पहले 217 एकड़ जमीन के स्वामित्व पर हिस्सेदारी में बेतिया एस्टेट की अंतिम महारानी जानकी कुंवर का नाम दर्ज है। अब इन जमीनों पर दूसरे लोगों का कब्जा है और खतौनी में उनके नाम भी चढ़ गए हैं। बेतिया एस्टेट के प्रशासक ने जिला प्रशासन से जांच कराने और खेवट की नकल मांगी है। वहीं, इस पूरे मामले से बिहार सरकार को भी अवगत कराया है।
दरअसल, वर्ष 2017-18 में बिहार सरकार ने सर्वेक्षण कराया था जिसमें महराजगंज के परतावल स्थित पिपरिया गांव में बेतिया एस्टेट की 7.50 एकड़ जमीन मिली। इस वर्ष बिहार सरकार ने फिर से बेतिया एस्टेट की जमानों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है। बिहार सरकार की ओर से नियुक्त प्रशासक एवं सहायक बंदोबस्त अधिकारी बद्री प्रसाद गुप्ता ने अपनी टीम के साथ मौका-मुआयना किया तो पाया कि जमीनों पर दूसरे लोगों का कब्जा है और खतौनी में उनके नाम भी दर्ज हैं।
इसके बाद तहसील का रिकॉर्ड खंगाला गया। खेवट में पाया गया कि मौजा नंबर 49 में 217 एकड़ जमीन है और स्वामित्व के कॉलम में बतौर सह स्वामित्व बेतिया एस्टेट की अंतिम महारानी का नाम दर्ज है। इसके आधार पर पर पता लगाया जा रहा है कि जमींदारी उन्मूलन के पहले बेतिया एस्टेट की कितनी जमीन थी। इस रिपोर्ट के आधार पर महराजगंज प्रशासन ने भी जांच शुरू दी है।
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क्या है खेवट
खेवट एक पुराना भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज है। इसमें जमींदार या भूस्वामी के हिस्से में आने वाली जमीनों का विवरण और लगान वसूली का हिसाब दर्ज होता है। इसे खाता संख्या भी कहते हैं और यह भूमि के स्वामित्व को इंगित करता है।
वर्जन
बेतिया एस्टेट की जमीन के प्रकरण की जांच कराई जा रही है। खेवट का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार शर्मा, डीएम, महराजगंज
सभी संपत्तियों की खेवट से कराएंगे जांच, गलत तरीके से चढ़ा दूसरों का नाम
बेतिया एस्टेट के प्रशासक एवं सहायक बंदोबस्त अधिकारी बद्री प्रसाद गुप्ता ने बताया कि महराजगंज में खेवट रिकॉर्ड को देखा गया है जिसमें मौजा 49 में 217 एकड़ जमीन दर्ज है। स्वामित्व में बेतिया एस्टेट की महारानी जानकी कुंवर का नाम दर्ज है। पहले कोर्ट ऑफ वार्ड्स संपत्ति का प्रबंधन करता था। जमीदारी उन्मूलन लागू होने के बाद स्वामित्व बदला गया। जो लोग खेत पर जोत का काम करते थे, उनके नाम चढ़ा दिए गए। इसकी जानकारी नहीं दी गई। वैसे भी कोर्ट ऑफ वार्ड्स की निगरानी वाली जमीनों पर दूसरे का नाम नहीं दर्ज हो सकता है। जिला प्रशासन से हमने मांग की है कि पुराने दस्तावेजों की जांच कराए और खेवट की नकल की कॉपी भी मांगी है। इसी प्रकार अयोध्या में भी बेतिया मंदिर और करीब डेढ़ एकड़ जमीन है। लेकिन खतौनी में नाम दूसरे लोगों का दर्ज हो गया है। उन्हीं का वर्तमान में कब्जा है। बिहार में बेतिया एस्टेट के कार्यालय से भी जमीनों का दस्तावेज जुटाया जा रहा है। पूरी रिपोर्ट बनाकर बिहार सरकार को भेजेंगे। इसके अलावा अब अन्य जिलों में भी खेवट दस्तावेज की जांच कराई जाएगी ताकि जमीनों का सही आकलन हो सके।
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अयोध्या में है बेतिया एस्टेट का बेतिया मंदिर और डेढ़ एकड़ जमीन
मंदिर के शिलापट्ट पर लिखा है बेतिया मंदिर और तत्कालीन महंत का नाम
खतौनी में अब चढ़ गया है दूसरों का नाम, खेवट से रिकॉर्ड खंगालेगा बेतिया एस्टेट
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बेतिया एस्टेट की करीब डेढ़ एकड़ जमीन अयोध्या में भी है। इसी परिसर में बेतिया मंदिर है जिसमें भगवान राम, सीता और हनुमान की मूर्तियां हैं। मंदिर को बेतिया के कारीगरों ने बेतिया की नागर शैली में बनाया है। अब मंदिर और जमीन पर स्वामित्व का नाम दूसरे लोगों का चढ़ गया है। बिहार सरकार के प्रशासक ने अब तक मिले दस्तावेजों को देकर प्रशासन से मांग की है कि खेवट से रिकॉर्ड की जांच कराई जाए ताकि स्वामित्व का पता चल सके।
बिहार सरकार के प्रशासक बद्री प्रसाद गुप्ता ने तीन दिन पहले ही अयोध्या जाकर मौका-मुआवना किया और तहसील से रिकॉर्ड खंगाला। अयोध्या मुख्य मंदिर से करीब आधा किलोमीटर दूर एक मंदिर है। उनका दावा है कि बेतिया सरकार की ओर से बनवाया बेतिया मंदिर अभी भी मौजूद है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही बेतिया मंदिर लिखा शिलापट्ट है जिसमें तत्कालीन महंत लक्ष्मण दास का नाम भी दर्ज है। इसका जिक्र बेतिया एस्टेट के रिकॉर्ड में भी है। जमीनों के पांच टुकड़े हैं लेकिन खतौनी पर अब दूसरे लोगों का नाम दर्ज है। प्रशासक की ओर से पूरे मामले की जांच कराने के लिए जिला प्रशासन से की गई है।