- ईएमआई भरने का झांसा देकर शिक्षक से निवेश कराने के नाम पर 55 लाख हड़पने का मामला
- आरोपियों के खिलाफ चौरीचौरा थाने में भी दर्ज है धोखाधड़ी की प्राथमिकी
गोरखपुर। रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और ऑल ट्रेड मार्ट लिमिटेड के निदेशकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शिक्षक से पर्सनल लोन के जरिये 55 लाख रुपये का निवेश कराकर धोखाधड़ी करने के मामले में रामगढ़ताल थाने में कंपनी के प्रोपराइटर और निदेशकों के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है। इससे पहले आरोपियों पर चौरीचौरा थाने में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी मोबाइल फोन बंद कर अंडरग्राउंड हो गए हैं। सर्विलांस की मदद से उनकी तलाश की जा रही है।
देवरिया के भाटपाररानी टीकमपार निवासी रविकांत कुमार के अनुसार, वह उच्च प्राथमिक विद्यालय त्रिलोकपुर कंपोजिट, नौतनवां महराजगंज में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। वर्ष 2023-24 में गोरखपुर स्थित रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और ऑल ट्रेड मार्ट लिमिटेड में निवेश के लिए उन्हें लालच दिया गया। कंपनी के प्रोपराइटर सरैया टोला लठौरवा निवासी सुशील कुमार निगम, निदेशक भाई किशन कुमार, रश्मी बाला के साथ फरेंदा में उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक गणेश प्रसाद और छेदी प्रसाद निषाद ने अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाया और कहा कि विभिन्न बैंकों से लिए जाने वाले पर्सनल लोन की ईएमआई कंपनी खुद भरेगी, जिससे किसी भी बैंक में किस्त बाउंस नहीं होगी।
आरोप है कि इन्हीं आश्वासनों पर पीड़ित से अलग-अलग बैंकों से पर्सनल लोन कराकर कुल 55 लाख रुपये कंपनी में निवेश कराए गए। शुरुआती छह माह तक कंपनी की ओर से ईएमआई की रकम नियमित रूप से दी जाती रही, जिससे शिक्षक को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। इसके बाद अक्तूबर 2024 से कंपनी ने बहानेबाजी शुरू कर दी और ईएमआई देनी बंद कर दी। मजबूरी में पीड़ित ने उधार लेकर जनवरी 2025 तक किसी तरह बैंक की किस्तें जमा कीं, लेकिन इसके बाद आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि बैंक भुगतान करना संभव नहीं रहा।
पीड़ित का कहना है कि अब उन पर करीब 38 लाख रुपये की बकाया ईएमआई का बोझ है और कुल देनदारी 93 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। बैंकों की ओर से लगातार वसूली नोटिस मिलने से वह गहरे मानसिक तनाव में है और परिवार के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी का एक संगठित रैकेट है, जो लोगों से पर्सनल लोन करवाकर निवेश कराता है और जब किस्तें बाउंस होने लगती हैं तो जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। पीड़ित ने पुलिस से गुहार लगाई है कि उसका 55 लाख रुपये मूलधन और 38 लाख रुपये की बकाया ईएमआई कंपनी से वापस दिलाई जाए ताकि वह बैंक का कर्ज चुका सके।
सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
ईपीओ लॉन्च करने के नाम पर 500 लोगों को लगाया चूना
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी के निदेशकों ने आईपीओ लॉन्च करने के नाम पर करीब 500 लोगों से 1.05 लाख रुपये प्रति व्यक्ति की दर से लगभग 5.25 करोड़ रुपये की वसूली की है। निवेशकों को शेयर सर्टिफिकेट और बॉन्ड भी दिए गए, लेकिन जांच में यह सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।
ये लोग भी हो चुके हैं ठगी के शिकार
जालसाजों ने झांसे में आए श्यामजी रावत से 80 लाख रुपये, गिरिजेश से 15 लाख, प्रह्लाद सिंह से 34 लाख, विशाल सिंह यादव से 35 लाख, अखिलेश निषाद से 32 लाख, रामपत से 50 लाख, राजन निषाद से 6 लाख और अशोक निषाद से 10 लाख रुपये जमा कराए गए थे। केवल इन नौ निवेशकों से ही कुल 2 करोड़ 62 लाख रुपये की रकम ली गई। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य लोगों से भी सात करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि कंपनियों में निवेश कराई गई है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी की ओर से ‘डे मैक्स एप’ बनाकर दिखाया गया, जिसके जरिये ऑनलाइन मीटिंग कर बिजनेस मॉडल और मुनाफे का प्रदर्शन किया जाता था। ठगी के शिकार पीड़ितों ने चौरीचौरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।