पहले फेज में 24.78 किमी लंबी रेललाइन बिछाने का काम, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में
तीन नए स्टेशन और एक हॉल्ट स्टेशन बनेगा, बिहार रूट की ट्रेनों को चलाने के लिए मिलेगा नया विकल्प
गोरखपुर। आनंदनगर-महराजगंज-घुघली नई रेललाइन बिछाने के लिए महराजगंज से घुघली के बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब रेल प्रशासन ने टेंडर जारी कर दिया है। दो चरणों में काम कराया जाएगा। पहले चरण का काम दशहरा के बाद शुरू होने की उम्मीद है। इस रेल लाइन के बीच कुल छह स्टेशन पड़ेंगे।
आनंदनगर और घुघली स्टेशन से पहले से बना हुआ है जबकि तीन नए स्टेशन और एक हॉल्ट स्टेशन बनाया जाएगा। इसके बनने से बिहार रूट की ट्रेनों को चलाने के लिए एक नई रेललाइन का विकल्प मिल जाएगा।
आनंदनगर-महराजगंज-घुघली (52.7 किमी) नई रेललाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए रेल प्रशासन ने 383 करोड़ रुपये शासन को दे दिए हैं। अब तक 70 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहीत कर ली गई है। शेष 160 हेक्टेयर भूमि के लिए भी अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इस वित्तीय वर्ष इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नई रेल लाइन बिछ जाने से गोरखपुर रूट की जगह गोंडा से आनंदनगर और महराजगंज होते हुए घुघली तक 42 किमी की दूरी कम हो जाएगी।
53 गांवों से गुजरेगी रेल लाइन, दो चरणों में होगा काम
230 हेक्टेयर भूमि पर 53 गांवों से होकर गुजरने वाली 52.7 किमी नई रेल लाइन के निर्माण के लिए 958.27 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है। यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में घुघली से महराजगंज (24.78 किमी) तक और दूसरे चरण में महराजगंज से आनंदनगर (26.52 किमी) तक रेल लाइन बिछाई जाएगी।
24 पुल और एक आरओबी बनेगा
परियोजना के तहत कुल 24 पुल बनने हैं, जिसमें एक बड़ा भी शामिल है। इसके अलावा एक आरओबी, 46 अंडरपास बनाए जाने हैं।
चार नए स्टेशन बनेंगे
पिपरा मुंडेरी हॉल्ट, महाराजगंज, पकड़ी नौनिया और परीसा बुजुर्ग।
वर्जनआनंदनगर से महराजगंज होते हुए घुघली नई रेललाइन परियोजना के अंतर्गत प्रथम चरण में महराजगंज से घुघली के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। घुघली से आनंदनगर के मध्य भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। इस रेललाइन के निर्माण से स्थानीय विकास के साथ महराजगंज जिला मुख्यालय को रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अतिरिक्त देश के उत्तरी क्षेत्र को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग मिलेगा।
-पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर