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Gorakhpur News: तीमारदारों को इलाज में लापरवाही का डर दिखाकर बहकाते हैं एंबुलेंस माफिया

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रात में धड़ल्ले से चलता है खेल, पुलिस को लगातार मिल रही थी शिकायत
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निजी अस्पताल संचालक, एंबुलेंस चालक और बिचौलियों का है नेटवर्क
बीआरडी मेडिकल कॉलेज से बहकाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में कराते हैं भर्ती
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास एंबुलेंस माफिया का धंधा लंबे समय से चल रहा है। निजी अस्पतालों के संचालक, बिचौलियों और एंबुलेंस चालकों की मदद से अस्पताल में भर्ती होने आए मरीजों और उनके परिजनों को बरगला कर अपने अस्पतालों में भर्ती करा देते हैं और इलाज के नाम पर मनमाना वसूलते हैं। मरीजों को बरगलाने का खेल खासतौर पर रात में ज्यादा होता है।

सूत्रों के मुताबिक, निजी अस्पतालों से जुड़े एंबुलेंस चालक मेडिकल कॉलेज के आसपास घूमते रहते हैं। वार्डों में मौजूद दलाल मरीजों के परिजनों को सरकारी अस्पताल में इलाज में लापरवाही और लापरवाह डॉक्टरों का भय दिखाते हैं फिर अपनी बातों में उलझाकर निजी अस्पताल में इलाज के लिए राजी कर लेते हैं। मौका मिलते ही ये लोग मरीजों को एंबुलेंस में बैठाकर चुपके से ले जाते थे। निजी अस्पताल में ले जाने के बाद इलाज के नाम पर मरीजों और तीमारदारों का दोहन शुरू हो जाता है। सूत्रों की माने तो हर मरीज पर एंबुलेंस वालों को मोटा कमीशन मिलता है। ये माफिया दूसरे जिलों से आने वाले मरीजों को टारगेट करते हैं। देवरिया, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर से आए मरीजों को निजी अस्पताल में भेजने के कई मामले भी आ चुके हैं।
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एक एंबुलेंस जौनपुर में है पंजीकृत
मंगलवार रात में पकड़े गए एंबुलेंस की जांच में सामने आया कि गाड़ी नंबर यूपी 32 ईएन 8933 यूनिवर्सल हॉस्पिटल मेडिकल कॉलेज रोड झुंगिया, यूपी 62 एटी 0631 राजाराम अहियारपुर जौनपुर और यूपी 32 एफएन 3698 लोक प्रिया हॉस्पिटल राप्तीनगर फेज-1 के नाम पंजीकृत थीं। जबकि अन्य दो एंबुलेंस, नंबर यूपी 76 के 1776 और यूपी 44 टी 8386 का आरटीओ में कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला।

पहले भी आ चुके हैं मामले

बिहार से आए मरीज की डूब गई थी पूंजी
दिसंबर 2024 में गोपालगंज जिले के भोरे निवासी राजेंद्र चौधरी अपने घायल भतीजे को इलाज के लिए लेकर एम्स आए थे। इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने हालत अत्यंत गंभीर बताई। परेशान राजेंद्र वार्ड के बाहर खड़े अपने रिश्तेदारों से फोन पर बात कर रहे थे, इसी दौरान एक युवक आया और मरीज की हालत को लेकर चर्चा करने लगा। मरीज के सिर व पैर में चोट की बात सुनते ही बोला कि यहां न्यूरो के एक ही डॉक्टर हैं, वह ऑपरेशन करने नहीं आएंगे। बेतियाहाता के एक अस्पताल का पता बताते हुए वहां तुरंत आयुष्मान कार्ड पर ऑपरेशन का सुझाव दिया। राजेंद्र उसकी बातों में आ गए और सरकारी एंबुलेंस बुलाने की बात कहने लगे। इस पर युवक ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस यहां नहीं आएगी। अभी एंबुलेंस बुला देते हैं, सिर्फ 500 रुपये में पहुंचा देगी। इसके बाद युवक ने कॉल कर एंबुलेंस बुलाई को मरीज को उससे भिजवा दिया। पांच दिन में अपनी सारी जमा पूंजी गंवाने के बाद वे फिर मरीज लेकर वापस एम्स में भर्ती कराना चाहते थे। यहां डॉक्टरों ने हाथ खड़े किए, तब लेकर लखनऊ गए।

बीआरडी जाने वाले मरीज को भेज दिया निजी अस्पताल
सिद्धार्थनगर के गोल्हौरा थाना क्षेत्र के महुआ खुर्द निवासी मायापति दुबे की पत्नी गीता देवी को 20 दिसंबर 2024 की रात सात बजे प्रसव पीड़ा के साथ रक्तस्राव शुरू हुआ। उन्हें जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहां से मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जा रहा था। इसी समय एक प्राइवेट एंबुलेंस वाला मिला था और उसने मेडिकल कॉलेज में अच्छी सुविधा न होने की बात करते हुए प्राइवेट अस्पताल में अच्छी व सस्ती सुविधा का झांसा देकर सिनेमा रोड, गोलघर खोवा मंडी में एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां ऑपरेशन से प्रसव के लिए एडवांस के तौर पर छह हजार रुपये जमा कराए गए थे। 21 दिसंबर की सुबह नौ बजे तक दवाओं के नाम पर कई किस्तों में 15 हजार रुपया जमा कराए गए। कोई रसीद नहीं दी। बाद में एक यूनिट ब्लड मंगवाया और फिर मेडिकल कॉलेज, रेफर करने की बात करने लगे। काउंटर पर हिसाब कराने को कहा, जहां 22 हजार रुपये और मांगे गए। इस दौरान लापरवाही पूर्वक जबरन प्रसव करा दिया। इससे जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई थी।
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अस्पताल कर्मियों ने गलत इंजेक्शन लगाकर मारने की दी थी धमकी
देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र के वार्ड नंबर 11 भरौली की लक्ष्मी देवी की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने केस दर्ज किया था। 17 जनवरी 2025 की रात करीब एक बजे उसकी देवरानी लीलावती के बच्चे के सीने में जकड़न होने पर देवरिया मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां से डॉक्टर ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। 108 नंबर की एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले आने पर यहां बाल रोग संस्थान के कर्मचारियों ने बताया कि वेंटिलेटर खाली नहीं है, दो दिन इंतजार करना पड़ेगा। एंबुलेंस चालक और ईएमटी बच्चे की गंभीर हालत का हवाला देते हुए उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए। वहां अस्पताल वालों ने एंबुलेंस चालक को पांच-पांच सौ रुपये के कई नोट दिए। अस्पताल वालों ने बच्चे की स्थिति गंभीर बताकर 60 हजार रुपये वसूल लिए। आरोप है कि बच्चे की हालत में सुधार न होने पर जब वापस मेडिकल कॉलेज ले जाने की बात की तो निजी अस्पताल कर्मियों ने गलत इंजेक्शन लगाकर जान से मारने की धमकी दी थी।
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