गोरखपुर। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रविवार को अक्षय नवमी जिसे आंवला नवमी भी कहा जाता है, मनाई जाएगी। श्रद्धालु आंवले की पूजा-अर्चना के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करेंगे। अक्षय नवमी में दान-पुण्य का विशेष व अक्षय लाभ श्रद्धालुओं का मिलता है। बताया जाता है कि अक्षय नवमी के दिन ही माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु व शिव को प्रसन्न करने के लिए आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर खिलाया था।
गोरखनाथ मंदिर के संस्कृत विद्यापीठ के प्रधानाचार्य व पंडित अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि जिस प्रकार भगवान शिव को बेल व भगवान विष्णु को तुलसी दल पसंद है उसी प्रकार इन दोनों देवताओं को आंवला पसंद है। यूं कहें की आंवले की पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव व भगवान विष्णु दोनों प्रसन्न होते हैं। काफी समय से आंवला पेड़ के नीचे भोजन करने कह परंपरा चल रही है।
गोरखनाथ मंदिर के गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने बताया कि इस दिन लोगों को आंवले की पूजा कर इस पेड़ के नीचे भोजन प्रसाद बनाकर ग्रहण करना चाहिए। उनका कहना था कि इस दिन किया गया दान-पुण्य क्षय नहीं होता है। इसका अक्षय लाभ मिलता है। आंवले के वृक्ष के पास जाकर सफाई करनी चाहिए व चावल, कुमकुम, हल्दी या सिंदूर से वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करने व दीपक जलाने के भगवान विष्णु व शिव की कृपा बरसती है।