दीक्षांत समारोह के लिए जुटे डिग्री व मेडल पाने वाले विद्यार्थी, किया रिहर्सल
गोरखपुर। एम्स में 30 जून को आयोजित होने वाले पहले दीक्षांत समारोह के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शनिवार को एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ विभा दत्ता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें दीक्षांत समारोह के लिए औपचारिक आमंत्रण पत्र दिया। दीक्षांत समारोह को लेकर शनिवार को रिहर्सल किया गया। इसमें डिग्री व पदक पाने वाले विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
सोमवार को दीक्षांत समारोह में कुल 61 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी, जिनमें 48 एमबीबीएस, 8 एमएससी नर्सिंग और 5 एमएससी मेडिकल के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं शामिल होकर एम्स के 8 टॉपर्स को गोल्ड मेडल पहनाकर सम्मानित करेंगी। ये मेडल चरक, सुश्रुत, डॉ. सुशीला नैयर और डॉ. वीएन शिरोडकर जैसे चिकित्सा जगत की महान विभूतियों के नाम पर रखे गए हैं। डॉ. वीएन शिरोडकर गोल्ड मेडल इस बार दो मेधावी छात्राओं को दिया जाएगा।
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- मां की याद में दवाओं पर रिसर्च करेंगी टॉपर सौम्या
उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वाली सौम्या पांडेय ने एम्स में एमएससी नर्सिंग विषय में टॉप किया है। सौम्या के पिता हेमचंद्र पांडेय हैं। उनकी माता अरुणा पांडेय का वर्ष 2021 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। सौम्या ने अल्मोड़ा से 10वीं और 12वीं की शिक्षा प्राप्त की और बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान से बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री ली। सौम्या ने बताया कि मां की लंबी बीमारी और फिर खोने का अनुभव उनके लिए बहुत बड़ा मोड़ था। तभी तय कर लिया था कि मेडिकल रिसर्च ही रास्ता है। उनका लक्ष्य एक रिसर्च साइंटिस्ट बनना है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान और प्रभावी इलाज के लिए काम कर सके।
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पुरुष नर्सिंग में संवेदनशीलता के उद्देश से की नर्सिंग की पढ़ाई
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद निवासी वैभव शर्मा को एम्स के दीक्षांत समारोह में एमएससी नर्सिंग में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा। उनके पिता मृदुल शर्मा व माता किरण शर्मा हैं। परिवार में नाना, मामा, मामी, भाई के डॉक्टर होने के कारण उनके मन में भी मेडिकल क्षेत्र में रुचि जागृत हुई। वैभव ने बताया कि बीएचयू से पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि नर्सिंग केवल महिलाओं का पेशा नहीं है। संवेदनशीलता और सेवा किसी लिंग से नहीं, दृष्टिकोण से तय होती है। वैभव कहते हैं कि जब वे गोल्ड मेडल लेने मंच पर जाएंगे, तो अपने पिता के त्याग और दोस्तों की प्रेरणा को दिल से याद करेंगे।