गोरखपुर। पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रो. सुरेखा किशोर के बेटों की नियुक्ति के मामले में कार्रवाई से पहले गवर्निंग बॉडी ने एक कमेटी बनाकर तथ्यों की फिर से पड़ताल करने का निर्णय लिया है। यह कमेटी एक बार फिर इस मामले के सभी आरोपियों से बात कर उनका पक्ष जानेगी। इसके बाद नए तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र बनाएगी। इसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि जो आरोपी हैं, उन पर कार्रवाई की जाए, या फिर माफी दे दी जाए।
बता दें कि पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रो. सुरेखा किशोर को इस साल दो जनवरी को अपने दोनों बेटों की एम्स गोरखपुर में ही नियम विरुद्ध तरीके से जूनियर रेजिडेंट पद पर चयनित कर बिना कार्य कराए ही वेतन देने समेत कई गंभीर आरोप लगाते हुए हटाकर वापस एम्स ऋषिकेश उनके मूल विभाग भेज दिया गया था। मामले की जांच कर रही स्वास्थ्य विभाग की विजलेंस टीम ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी है, जिस पर कार्रवाई होनी है।
इसी को लेकर गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में मौजूद एक सदस्य ने बताया कि विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई से पहले इस मामले के आरोपियों को पुन: अपना पक्ष रखने का मौका देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए दो सदस्यीय कमेटी के गठन 15 दिन में करना होगा। कमेटी महीने भर में रिपोर्ट देगी।
एम्स ऋषिकेश भेजा गया प्रो. सुरेखा किशोर का मामला
मंगलवार शाम चार बजे हुई एम्स के गवर्निंग बाडी की बैठक में बताया गया कि पूर्व ईडी प्रो. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई के लिए एम्स ऋषिकेश को बीते अप्रैल में ही पत्र भेजा जा चुका है। इससे संबंधित पत्रावलियों को भी वहां भेज दिया गया है। प्रो. सुरेखा किशोर गोरखपुर एम्स में कार्यकारी निदेशक बनने से पहले एम्स ऋषिकेश में ही विभागाध्यक्ष थीं और अब भी वे वहीं तैनात हैं। वहीं बेटों की नियुक्ति के दौरान गड़बड़ी करने का जिन दो डाक्टरों और दो पूर्व अधिकारियों पर आरोप है उनका कहना है कि उनका पक्ष नहीं लिया गया था। इस बैठक में सांसद रविकिशन शुक्ल और वर्तमान कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय कुमार सिंह के अलावा डॉ. अशोक प्रसाद भी शामिल थे। एम्स के चेयरमैन देशदीपक वर्मा लंदन से वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।
वायरल वीडियो प्रकरण में मिली है रिपोर्ट
पिछले दिनों एम्स के जूनियर डॉक्टरों का एक वीडियो वायरल हुआ था, जो किसी डॉक्टर के जन्म दिन की पार्टी का था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद एम्स प्रशासन ने जांच कराई थी। वीडियो के आधार पर जो आरोपी बनाए गए थे, उन पर कार्रवाई के लिए फिर से एक कमेटी बनी थी। सूत्रों की मानें तो इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट कार्यकारी निदेशक के दफ्तर को सौंप दी है।
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