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एम्स: दूसरे आंतरिक परीक्षा में फिजियालॉजी विषय में फेल हुए 104 एमबीबीएस छात्र

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एम्स प्रशासन ने मंगलवार देर शाम पांच से आठ बजे के बीच दोबारा कराई अभ्यास परीक्षा
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गोरखपुर। एम्स में एमबीबीएस सत्र 2024 के द्वितीय आंतरिक परीक्षा परिणाम में 104 छात्र एक ही विषय फिजियोलॉजी में फेल हो गए हैं, जबकि बायोकेमिस्ट्री में 70 और एनाटॉमी में 35 छात्र पास नहीं हो सके। यह पहली बार है जब संस्थान में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में छात्र अंतरिक परीक्षा में ही असफल हुए हैं। परिणाम जानने के बाद कार्यकारी निदेशक के निर्देश पर मंगलवार की रात में शिक्षकों को बुलाकर फिर से छात्रों की अभ्यास परीक्षा कराई गई। इसके बाद छात्रों की अलग से काउंसिलिंग भी कराई जा रही है। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता इसकी स्वयं निगरानी कर रही हैं।

एम्स में प्रति बैच 125 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। मुख्य परीक्षा के पहले आंतरिक परीक्षा के माध्यम से छात्रों को तैयारी का मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिए जून के अंतिम सप्ताह में परीक्षा कराई गई थी। इसका परिणाम पिछले सप्ताह घोषित हुआ। इसमें 83 छात्र तीनों प्रमुख विषयों में फेल हुए हैं। इससे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसे सुधारने के लिए एम्स मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी। इसी के तहत बीते मंगलवार को छात्रों के लिए देर शाम दोबारा एक अभ्यास परीक्षा कराई गई, जिसमें सवालों के उत्तर भी समझाए गए। इस विशेष परीक्षा में छात्रों को पुस्तक देखने की छूट भी दी गई, ताकि वे अपनी कमियों को समझ सकें और अगली बार बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
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कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित विभागों से विस्तार से बातचीत की और निर्देश दिए कि छात्रों की पढ़ाई को अब और व्यवस्थित ढंग से कराया जाए।
एम्स की मीडिया सेल प्रमुख डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि आंतरिक परीक्षा का मकसद छात्रों की तैयारी की जांच करना होता है। यदि किसी विषय में छात्र पिछड़ रहे हैं, तो उन्हें समय रहते सुधारने के मौके दिए जाते हैं।
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शिक्षकों के बीच समन्वय की कमी का पड़ रहा असर
सूत्रों के अनुसार फिजियोलॉजी विभाग में शिक्षकों के बीच समन्वय की कमी और आंतरिक असहमति का असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ा है। वहीं छात्रों का कहना है कि पेपर अपेक्षा से अधिक कठिन था और पढ़ाई का समय सीमित होने के कारण वे पूरी तैयारी नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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