एमएमएमयूटी में बीटेक में फर्जी प्रवेश प्रकरण में कार्रवाई की तैयारियों के बीच चर्चा का बाजार भी गरम
जिनकी वजह से हुई विश्वविद्यालय की बदनामी, उन सभी पर कार्रवाई चाहते हैं शिक्षक-कर्मचारी
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बीटेक में प्रवेश फर्जीवाड़े के खुलासे के ढाई साल बाद पहली बार एफआईआर की तैयारी शुरू हो गई है। चर्चा है कि केवल एक संविदा कर्मचारी पर ही केस दर्ज कराया जाएगा। हालांकि इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। अब कैंपस में इस बात को लेकर चर्चा रही कि क्या अकेले आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने इतना बड़ा फ्रॉड कर दिया या इस खेल में और भी शामिल थे, जिनको बचाने का प्रयास हो रहा है।
एमएमएमयूटी के प्रबंध बोर्ड की बैठक में 30 जुलाई को निर्णय लिया गया था कि बीटेक में फर्जी प्रवेश प्रकरण में डीन यूजी ऑफिस में कार्यरत तत्कालीन आउटसोर्सिंग कर्मचारी अवनीश मणि त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। इस फैसले के अगले दिन कैंपस में घटना से जुड़ी पुरानी बातों को लेकर भी चर्चा होने लगी। शिक्षक-कर्मचारी यह चर्चा कर रहे थे कि इस घटना में कई लोगों की लापरवाही व संलिप्तता पाई गई थी। जांच में कई स्तरों पर चूक सामने आई थी। जिनकी वजह से विश्वविद्यालय की छवि खराब हुई थी, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
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समिति ने की थी केस दर्ज कराने की सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यलाय की प्रतिष्ठा धूमिल होने के बाद गठित समिति ने कई सिफारिशें की थी। इनमें दो सिफारिशें प्रमुख थीं। पहला, यह आपराधिक मामला है, इसलिए अज्ञात और नामजद के खिलाफ केस दर्ज कराया जाए। दूसरा, इस मामले की एसआईटी या एसटीएफ जांच के लिए राज्य सरकार से आग्रह किया जाए। इसमें किसी बड़े रैकेट के शामिल होने की आशंका भी जताई गई थी।
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आठ लोग आए थे जांच के दायरे में
एमएमएमयूटी प्रशासन ने 10 जनवरी 2023 को खुलासा किया कि 40 छात्र-छात्राओं को जाली दस्तावेज के जरिए बीटेक में प्रवेश मिला है। इनमें सत्र 2020-21 के 22 व सत्र 2021-22 के 18 विद्यार्थी शामिल हैं। उन सभी छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया। प्रवेश में गड़बड़ी के आरोप की जांच शुरू हुई तो तीन शिक्षक व पांच कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई। जांच में प्रथम दृष्टया इनमें से कुछ की संलिप्तता और कुछ की लापरवाही सामने आई। उधर निष्कासित छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में ही लंबित है। इस मामले में एक निष्कासित छात्र ने लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव के खिलाफ दिसंबर 2024 में केस दर्ज कराया था।