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Gorakhpur News: पाउडर से बन रहा मिलावटी पनीर.. रिफाइन-डिटर्जेंट भी मिला रहे धंधेबाज

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पनीर के आठ, सिंघाड़े के आटे के दो समेत 14 नमूनों की रिपोर्ट आई रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि
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विभिन्न तारीखों पर शहर की दुकानों से लिए गए थे नमूने
गोरखपुर। धंधेबाजों ने पनीर को भी खाने लायक नहीं छोड़ा है। शहर की विभिन्न दुकानों से लिए गए पनीर के आठ नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। दरअसल, नमूनों में फैट की मात्रा ही नहीं मिली है। ऐसा तभी होता है, जब पाउडर से बने पनीर में रिफाइन तेल और डिटर्जेंट मिलाया जाता है। ऐसा पनीर लिवर और आंत को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा सिंघाड़े के आटा में भी मिलावट पाई गई है। कुल 14 नमूनों की रिपोर्ट अपमिश्रित आई है।
शहर की विभिन्न दुकानों से लिए गए 14 खाद्य पदार्थों के नमूनों की रिपोर्ट मंगलवार को आई। अधोमानक और अपमिश्रित श्रेणी के इन नमूनों में से सबसे अधिक आठ पनीर के हैं। इसके अलावा दो नमूने सिंघाड़े के आटे के हैं। अब जिन दुकानों के नमूने फेल हुए हैं, उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सबसे खराब हालत पनीर की है। संदेह के आधार पर जिन आठ नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था, उन सभी में मिलावट पाई गई है।
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वहीं व्रत में सबसे अधिक खाए जाने वाला सिंघाड़ा का आटा भी शुद्ध नहीं है। बता दें कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने दशहरा से दिवाली के बीच शहर में अभियान चलाकर नमूने लिए थे। करीब 80 नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। पिछले महीने 19 की रिपोर्ट आई थी। इसके बाद 14 नमूनों की रिपोर्ट मिली है।
खजनी-बड़हलगंज क्षेत्र से आ रहा मिलावटी पनीर
शहर में हर दिन करीब नौ लाख क्विंटल दूध की खपत होती है, जबकि केवल ढाई लाख लीटर दूध का उत्पादन ही होता है। करीब ढाई लाख लीटर दूध विभिन्न कंपनियों का पैकेटबंद आता है। शेष करीब चार लाख क्विंटल दूध की डिमांड मिलावट से पूरी होती है। दूध के अलावा पनीर की भी खूब खपत होती है। बड़ा सवाल यही है कि जब दूध ही नहीं मिलता तो पनीर कैसे बनाएंगे। बाजार के सूत्रों का कहना है कि डिमांड पूरी करने के लिए खजनी और बड़हलगंज क्षेत्र से बड़ी मात्रा में पनीर शहर में आता है। यह पनीर पाउडर से बनाया जाता है। इसमें चिकनाई लाने के लिए रिफाइन और डिटर्जेंट का प्रयोग होता है। इसका फायदा यह होता है कि जांच में इस प्रकार के पनीर की रिपोर्ट में फैट मिसिंग आता है।

आटा और रंग से बनाते हैं बेसन
पनीर ही नहीं, बेसन भी मिलावटी बिक रहा है। सूत्रों का कहना है कि खुले में बिकने वाले बेसन में चावल और गेहूं के आटा के अलावा खाने वाला पीला रंग मिला देते हैं। इससे वजन बढ़ जाता है और रंग मिला होने से वह बेसन जैसा ही दिखता है।

वर्जन
मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए पिछले तीन महीने से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हर महीने 70 से 80 नमूने एकत्रित कर जांच के लिए भेजा जा रहा है। जैसे-जैसे रिपोर्ट मिल रही है, कार्रवाई भी हो रही है। पनीर के आठ नमूनों के मिलावटी होने की बात सामने आई है। अब इस मामले में विधिक कार्रवाई शुरू होगी।
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- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य

डॉक्टर की राय
मिलावटी व केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ सीधे लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा आंत, हृदय, आहार नाल आदि पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। पनीर में रिफाइन और डिटर्जेंट जैसे पदार्थों की मिलावट चिंताजनक है। ऐसा पनीर खाने से फूड प्वाइजनिंग भी हो सकती है।
- डॉ. राजकिशोर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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