उन्होंने कहा-पैसा ही उनका धर्म है, पैसा ही ईमान है, पर पैसे के लिए चोरी नहीं करेंगे, ईमान नहीं बेचेंगे, किसी से ठगी नहीं करेंगे। उन्होंने महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण की कथा सुनाते हुए कहा कि बुद्ध ने स्वर्ग के द्वार पर यह कहकर प्रवेश से ठुकरा दिया कि जबसे बोध हुआ इस बात की इच्छा है हर व्यक्ति को स्वर्ग के द्वार तक जबतक पहुंचा न दूं, तबतक इस स्वर्ग की मुझे कामना नहीं। बृहदारण्यक उपनिषद में सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसा श्लोक प्रेम और अध्यात्म के विचार में बंधन की अलौकिक मुक्ति का सबसे बड़ा संदेश है। यह जितना विस्तृत है उतना ही व्यापक भी।
उन्होंने राग देस में राजा भर्तृहरि के नीति शतक, श्रृंगार शतक और वैराग्य शतक की पृष्ठभूमि की कथा अमरफल की कहानी भी संगीतमय अंदाज़ में सुनाया और राजा भर्तृहरि और पिंगला के मध्य भिक्षाटन का संवाद सुनाकर दर्शको को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राजस्थानी लोकगीत ''केसरिया बालम आवो जी पधारो म्हारा देस'' गुनगुना कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इसके बाद मां के मातृत्व को समर्पित ''मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में, शीतल छाया तू दुख के जंगल'' में गुनगुनाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। इस बीच दर्शकों के सवालों का मज़ेदार और रोचक जवाब भी दिया। अपनी निजी जीवन और शादी के किस्से को बड़े ही मनोरंजक अंदाज में सुनाया। देशभक्ति गीत-ऐ मेरे प्यारे वतन सुनाकर विदा लिया। कार्यक्रम के शुरुआत में डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अंग वस्त्र व स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।