वर्ष 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग और कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग के बीच गंडक नदी के किनारे एक रेल लाइन बनवाने की घोषणा की। यह लाइन पनियहवा से शुरू होकर छितौनी, जटहां बाजार, भितहा होते हुए तमकुहीरोड स्टेशन तक जानी थी
गोरक्षनगरी को भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से सीधे जोड़कर पर्यटकों को सुविधा देने के लिए प्रस्तावित गोरखपुर-कुशीनगर-पडरौना रेल मार्ग का निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया है। अंतरिम बजट में इस परियोजना के लिए धन नहीं मिला है। वहीं, गंडक की बाढ़ से यूपी बिहार के गांवों को बचाने व सुगम यातायात साधन उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित पनियहवा-छितौनी-तमकुहीरोड रेल लाइन भी अब ठंडे बस्ते में है।
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सरदारनगर चीनी मिल तक गन्ना ढुलाई के लिए एक रेल लाइन ब्रिटिश काल में ही सरदारनगर से हेतिमपुर (कुशीनगर) तक बिछाई गई थी। वर्ष 1990 तक यह रेल लाइन वजूद में रही, लेकिन मिल के बंद होने व इस रेल मार्ग पर सवारी गाड़ियों का संचालन नहीं होने के चलते रेल लाइन अनुपयोगी हो गई।वर्ष 2012 में इस रेल मार्ग को हेतिमपुर से बढ़ाकर कुशीनगर होते हुए पडरौना में कप्तानगंज-थावे रेल लाइन से जोड़ने की योजना बनी।
उद्देश्य यह था कि इससे भगवान बुद्ध की महानिर्वाण स्थली कुशीनगर तक गोरखपुर से सीधे आवागमन से पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। इससे गोरक्षनगरी से लेकर बुद्ध नगरी तक स्थानीय पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी। करीब 65 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन में से लगभग 40 किलोमीटर हिस्सा पुरानी लाइन का ही था। केवल हेतिमपुर से कुशीनगर होते हुए पडरौना तक करीब 25 किलोमीटर नई लाइन बिछाई जानी थी।
वर्ष 2017 में हुआ था सर्वे
इस रेल परियोजना के लिए वर्ष 2017 में सर्वे हुआ था। वर्ष 2018-19 में इसे प्रशासनिक स्वीकृति मिली। इस परियोजना की लागत 1,345 करोड़ से बढ़ाकर अब 1,467 करोड़ रुपये कर दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2019-20 के केंद्रीय बजट में इस रेल मार्ग के मंजूरी की बात कही थी। इसके लिए 10 लाख रुपये टोकन मनी भी जारी किया गया, लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ी।
तीन किलोमीटर बनकर बंद हो गई पनियहवा-छितौनी-तमकुही रेल लाइन
वर्ष 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने गोरखपुर-नरकटियागंज रेल मार्ग और कप्तानगंज-थावे रेल मार्ग के बीच गंडक नदी के किनारे एक रेल लाइन बनवाने की घोषणा की। यह लाइन पनियहवा से शुरू होकर छितौनी, जटहां बाजार, भितहा होते हुए तमकुहीरोड स्टेशन तक जानी थी। इसके बनने से गंडक नदी के दोनों तरफ दियारा में बसे करीब 150 गांवों को हर साल बाढ़ से बचाव की उम्मीद थी।
धन मिला और तेजी से काम भी शुरू हुआ, लेकिन पनियहवा से छितौनी तक तीन किलोमीटर लंबी पुरानी लाइन के हिस्से को ब्राॅड गेज में बदलने और बंद पड़े छितौनी स्टेशन के दुबारा सुंदरीकरण से आगे बात नहीं बढ़ी। इस तीन किलोमीटर लंबी लाइन का ट्रायल भी हो गया, लेकिन करीब 10 साल से इस पटरी पर कोई ट्रेन भी नहीं गुजरी। स्टेशन व रेल लाइन का उपयोग नहीं होने के चलते यह गंदगी से भर गए। जिनकी जमीन इस रेल मार्ग के लिए अधिग्रहित की जानी थी, वे भी अभी तक सहमे हैं कि पता नहीं कब सरकार कार्रवाई शुरू कर दे।