इस योजना में शहर की सड़कों की मशीन से सफाई करने के अलावा फुटपाथों पर इंटरलॉकिंग करने, दोनों किनारों पर अधिक पौधे लगाने, विभिन्न चौराहों पर फव्वारों की व्यवस्था करने, सड़कों के डिवाइडर पर ग्रीन बेल्ट का विकास करने, शहर में जगह-जगह पार्किंग की व्यवस्था, यातायात को नियंत्रित करने सहित अन्य इंतजाम किए जाने हैं।
कुछ उपायों पर काम शुरू भी हो गया है। इस योजना के तहत शहर में इंटरलॉकिंग का काम चल रहा है। लेकिन अन्य उपायों को अपनाने में अधिकारी पीछे रह गए हैं। सड़कों के डिवाइडर पर पौधों का अभाव नजर आता है।
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गोरखपुर शहर में लगातार पांच साल तक वायु की गुणवत्ता खराब होने पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे नॉन अटेनमेंट सिटी में शामिल कर देता है। इसमें सुधार करने के लिए सीपीसीबी के तहत वे सभी उपाय किए जाते हैं, जिनसे वायु प्रदूषण पर लगातार नजर रखते हुए उसका स्तर सुधारा जा सके।
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गोरखपुर शहर में वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव करने, पराली नहीं जलाने सहित अन्य निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।