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गोल्डन कार्ड बनवा ‘आयुष्मान’ हुए समाचार पत्र वितरक व उनके परिजन

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गोल्डन कार्ड बनवा ‘आयुष्मान’ हुए समाचार पत्र वितरक व उनके परिजन
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गोरखपुर। रुस्तमपुर देवरिया बाईपास स्थित अमर उजाला के सिटी ऑफिस में बुधवार को आयुष्मान योजना के गोल्डन कार्ड बनाए गए। 17 समाचार पत्र वितरक और उनके परिवार के सदस्यों के 35 कार्ड बने। इससे पत्र वितरक खुशी से चहक उठे। सब बोले- अब सालाना पांच लाख रुपये के इलाज की सरकारी योजना लाभ उठा सकेंगे। यह योजना लंबे समय से चल रही थी लेकिन जानकारी के अभाव में हम इन सभी सुविधाओं से वंचित थे। अमर उजाला के सहयोग से पूरे परिवार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान हो गया है। इसका लाभ हर पत्र वितरक को मिले, ऐसी अमर उजाला की मंशा है।
समाचार पत्र वितरक शीतलहर, बारिश या लू, हर हालत में रोजाना सूर्योदय के साथ ही पाठकों के घरों तक समाचार पत्र पहुंचाते हैं। कर्तव्य निभाने की धुन में यह कर्मयोगी जाने अनजाने खुद और अपने परिवार के हितों की अनदेखी कर जाते हैं। शहर के तमाम समाचार पत्र वितरक आयुष्मान भारत योजना में चयनित हैं लेकिन उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। जानकारी नहीं होने के कारण वह और उनके परिवार के सदस्य प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा पाने से वंचित हो रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अमर उजाला ने बुधवार को आयुष्मान भारत योजना का कैंप लगवाया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन सुविधा केंद्र गोरखनाथ के जयंत कुमार श्रीवास्तव, गौरव भारती, ओंकार यादव की टीम ने लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड तैयार किए।
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सुबह 11 बजे से शुरू हुए कैंप में शाम पांच बजे तक शहर के समाचार पत्र वितरकों का तांता लगा रहा। सभी लोग अपना राशन कार्ड, आधार कार्ड आदि लेकर आए थे। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सूची में लाभार्थियोें का नाम खोजने और उनका कार्ड बनवाने में डीडी अग्रहरि, मनीष पांडेय, सोनू माझी, राम सिंह पासवान, उमाशंकर मझवार, राजकुमार, बच्चा लाल अग्रहरि, चंद्रेश गुप्ता, संतोष गुप्ता, अरुण गुप्ता, संतोष गुप्ता, सोनू मांझी, ज्ञानू तिवारी, विशंभर मिश्रा और राकेश ने सहयोग किया।
इन समाचार पत्र वितरक और उनके पारिवारिक सदस्यों के बने गोल्डन कार्ड
सीताराम, दिनेशचंद्र, मनोज कुमार, रीता देवी, राजकिशोर, राजू बक्शीपुर, रितेश, राजकुमारी, रीतिका, सुनील, भुआल शर्मा, रीना शर्मा, रितिक शर्मा, अमित कुमार, चंद्रेश गुप्ता बक्शीपुर, अभय और श्रवण कुमार रेलवे के व्यक्तिगत और परिवार के सदस्यों के गोल्डन कार्ड बनाए गए।
जिनके नाम सूची में, उन्हीं के कार्ड बने
आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए बड़ी संख्या में पत्र वितरक आए। तमाम पत्र वितरक ऐसे रहे, जिनके नाम 2011 की जनगणना में नहीं हैं। इस सूची में जिन लोगों के नाम हैं, उन्हीं के कार्ड बन सकते हैं। यह सूची सरकार की तरफ से तैयार कराई गई है। वार्डों के नाम बदलने से भी दिक्कत आई है। स्वास्थ्य विभाग के पास लाभार्थियों की जो सूची है, उसमें पुराने वार्डों का जिक्र है। अब वार्डों की नंबरिंग नए सिरे से कर दी गई है। कुछ पत्र वितरकों के राशन कार्ड उनके पिता या फिर दादा के नाम से हैं, इसलिए लाभार्थी का नाम तलाशने में दिक्कत आ रही है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए ही स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित गोल्डन कार्ड बनाओ शिविर को आगे बढ़ा दिया गया है।
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गोल्डन कार्ड कैंप आज भी
अमर उजाला और स्वास्थ्य विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को भी गोल्डन कार्ड कैंप लगाया जाएगा। रुस्तमपुर देवरिया बाईपास स्थित अमर उजाला के दफ्तर में लगने वाले शिविर में सिर्फ समाचार पत्र वितरक और उनके परिवार के सदस्यों के ही गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि लाभार्थी सूची में वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर नाम शामिल किए गए हैं। सूची में नाम खोजने के लिए वर्ष 2011 के वार्ड को आधार बनाया गया है न कि वर्तमान वार्ड संख्या को। लाभार्थी को चाहिए कि वह पुरानी वार्ड की संख्या ही लाएं। जिन लोगों को प्रधानमंत्री का पत्र, हाउस होल्ड (एचएच) आईडी वाला प्लास्टिक कार्ड या मुख्यमंत्री की ओर से जारी किया गया पत्र है, वह भी लाभ उठा सकते हैं। योजना का लाभ पाने के लिए राशन कार्ड के साथ आधार कार्ड का होना जरूरी है।
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