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यूपी: रोहिंग्या और अपराधियों की तलाश में 11 जिलों में चलेगा अभियान, गोरखपुर एडीजी ने बनाया खास प्लान

Sun, 20 Jun 2021 07:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

नेपाल सीमा से सटे होने की वजह से किरायेदार बनकर छिपने की आशंका पर एडीजी ने जारी किया आदेश। किरायेदारों का होगा सत्यापन, पुलिस की तय की गई जिम्मेदारी।
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एडीजी अखिल कुमार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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आतंकी और रोहिंग्या को लेकर गोरखपुर जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। गोरखपुर सहित आसपास के जिलों में भी पुलिस किरायेदारों का सत्यापन कर जांच पड़ताल करेगी। गोपनीय रिपोर्ट आई है कि आतंकी और रोहिंग्या किराएदार बनकर यहां पर छिप सकते हैं क्योंकि यहां से नेपाल सीमा करीब में है। एडीजी अखिल कुमार ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में यूपी में आठ रोहिंग्याओं की गिरफ्तारी के बाद गोरखपुर जोन के सभी 11 जिलों में रोहिंग्या की तलाश शुरू हो गई है। इन्हें चिन्हित कर कार्रवाई करने के लिए गोरखपुर जोन के एडीजी अखिल कुमार ने यहां सभी तीन रेंज के डीआईजी व 11 जिलों के पुलिस कप्तानों को निर्देश जारी किया है। 

एडीजी अखिल कुमार ने कहा है कि अपराधियों से लेकर रोहिंगा तक विभिन्न जिलों में अपनी पहचान छिपाकर ठिकाना बदल- बदल कर रह रहे हैं। मकान मालिक भी उनकी पूरी जानकारी लिए बगैर ही मकान किराये पर दे देते हैं। ऐसे में सभी जिलों में अभियान चलाकर किराये के मकानों में रह रहे लोगों का सत्यापन कराया जाए। ताकि ऐसे संदिग्धों को चिन्हित कर उनपर कार्रवाई की जा सके।
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नेपाल से पांच जिले व बिहार सीमा से जुड़े हैं तीन जिले

एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि जोन के पांच जिले नेपाल सीमा व तीन जिले बिहार की सीमा से जुड़े हैं। ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में अपराधियों के साथ ही देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के प्रवेश की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में अपराध व अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए किरायेदारों का सत्यापन कराना बेहद ही जरूरी है। सत्यापन के लिए पुलिस को अपराधियों की पूरी जानकारी तो मिल ही जाती, साथ ही उनके छिपकर रहने की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाती है। क्योंकि पुलिस वैरिफिकेशन से अपराधियों में भय होने लगता है। हालांकि यह भी देखा गया है कि किरायेदारों का सत्यापन कराने के लिए मकान मालिक की ओर से कोई खास रूचि नहीं ली जाती है। ऐसे में इन संदिग्ध अपराधियों को छिपकर रहने में सहूलियत मिल जाती। 
 
संतकरीबनगर में पकड़ा गया था रोहिंग्या, गोरखपुर से बना था पासपोर्ट  
यूपी एटीएस ने इसी साल छह जनवरी को संतकबीरनगर जिले के समर्थन गांव में बसे रोहिंग्या अजीजुल्लाह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 28 फरवरी को अलीगढ़ के कमेला रोड पर रह रहे मोहम्मद फारुख और हसन को पकड़ा गया था। फारुख के भाई शाहिद को 1 मार्च को उन्नाव से दबोचा गया। शाहिद के बहनोई जुबेर के बारे में भी एटीएस को जानकारी मिली है, लेकिन वह अभी हाथ नहीं लग सका है। इतना ही नहीं, इस मामले में एटीएस की पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ था कि रोहिंग्या अजीजुल्लाह का पासपोर्ट गोरखपुर से बना था। इस मामले में एटीएस ने यहां पासपोर्ट दफ्तर के कई दलालों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।
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दिल्ली में पकड़े गए आतंकी का यूपी से है ताल्लुक
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी का यूपी से ताल्लुक है। आशंका है कि उसका बिहार से भी संपर्क हो। हाल के वर्षों में चार बड़े आतंकी विभिन्न राज्यों से लगी नेपाल सीमा से पकड़े गए। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकी घुसपैठ का सबसे आसान रास्ता भारत-नेपाल सीमा है। आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान के लिए भारत-नेपाल सीमा सबसे मुफीद साबित हो रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, नेपाल में पाकिस्तान एंबेसी आतंकियों के छिपने और रहने का प्रबंध करती है। भारत व नेपाल के बीच उपजे ताजा सीमा विवाद व तनाव के कारण नेपाल में ये गतिविधियां बढ़ गईं हैं।

सोनौली सीमा से पकड़े गए प्रमुख आतंकी
  • 1991 मे खालिस्तान एरिया फोर्स का डिप्टी कमांडर सुखबीर सिंह।
  • 1991 में ही नेपाल की बढ़नी सीमा पर खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के भागा सिंह और अजमेर सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।
  • 1993 में आतंकी टाइगर मेमन।
  • 1995 में आईएसआई एजेंट यासिया बेगम।
  • 2000 में आसिम अली और चार आतंकी।
  • 2002 में परसामलिक थाने के पास कारतूसों का जखीरा पकड़ा गया था जो कि बिहार के एमसीसी उग्रवादियों ने नेपाल के माओवादियों के लिए भेजा था।
  • 2007 में लश्कर के आतंकी सादात रशीद मसूद आलम की गिरफ्तारी।
  • 2009 में मुंबई के आतंकी नूरबक्श और इश्तियाक उर्फ शैतान की गिरफ्तारी।
  • 2013 में आतंकी लियाकत अली शाह की गिरफ्तारी।
  • 2013 में आतंकी हमलों में 140 लोगों की हत्या के आरोपी और मोस्ट वॉन्टेड आंतकवादी यासीन भटकल की गिरफ्तारी।
  • अब्दुल करीम टुंडा को भी उत्तराखंड में नेपाल की खुली सीमा पर ही गिरफ्तार किया गया था।
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