- नमाज अदा कर मांगी देश में खुशहाली और सलामती की दुआअमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रमजान के अंतिम जुमा अलविदा की नमाज जिले भर में अमन व शांति के साथ अदा की गई। नमाज के बाद सभी ने मुल्क में सुख-शांति, कौम की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी। रमजान को अब महज चार दिन और रह गए हैं, ऐसे में लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत कर जहन्नम से निजात व मगफिरत की भी दुआ कर रहे हैं। नमाज से पहले उलमा ने तकरीर में जकात, फित्रा, शबे कद्र, ईद सहित तमाम दीनी मामलात पर रोशनी डाली।
सुबह से ही लोग अलविदा की तैयारी में जुगे नजर आए। तय वक्त पर नमाज अदा की गई। रमजान का आखिरी जुमा होने के कारण मस्जिद नमाजियों से भरी रही। ग्रामीण अंचलों से भी ईद की खरीदारी करने के लिए शहर पहुंचे लोगाें ने भी नमाज अदा की। अलविदा होने के कारण कुछ मस्जिदों में जगह कम पड़ गई। नमाजियों को मस्जिद की छतों आदि पर दरी व चटाई बिछाकर नमाज अदा की। मस्जिद कमेटी ने रोजेदारों का ख्याल रखते हुए उन्हें धूप से बचाने के लिए शामियाना आदि का इंतजाम किया था।
जुमा की नमाज से पहले अलविदा का खुत्बा पढ़ा गया। उसमें रमजान की अहमियत बताई गई। अंत में सभी ने पैगंबर मोहम्मद साहब पर दरूद और सलाम पेश किया। उंचवा मस्जिद में इमाम ने बताया कि रमजान में महज कुछ दिन बचे हैं, इसमें लोगों को चाहिए कि अल्लाह से अपनी गुनाहों की तौबा करते हुए जहन्नम से निजात मांगे। वह रोजा खोलने के बाद मोबाइल और टीवी में अपना वक्त बर्बाद करने के बजाए कुरआन पढ़ें और नफिल नमाज अदा करें। उन्होंने कहा कि अपने-माता पिता से ऊंची आवाज में न बोले, अगर ऐसा करते हैं तो रोजे में कमाई हुई सारी नेकियां बर्बाद हो जाएंगी।
उलमा किराम अवाम से हुए मुखातिब की नसीहत
रमजानुल मुबारक के अंतिम जुमा (अलविदा) में उलमा किराम अवाम से मुखातिब हुए खूब नसीहत की। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि आपसी भाईचारा को कायम रखें। फित्रा व जकात की रकम जल्द निकाल हकदारों तक पहुंचा दें। बेलाल मस्जिद अलहदादपुर में कारी शराफत हुसैन कादरी ने कहा कि ईद की खुशियों में सबको शामिल करें। मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर में मौलाना मो. फिरोज निजामी ने कहा कि ईद की रात बहुत बरकत वाली होती है, लिहाजा इसे इबादत में गुजारें। मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह में मौलाना जहांगीर अहमद, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में मौलाना महमूद रजा कादरी, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में हाफिज रहमत अली ने आमालों से जुड़ी बातें बताईं।