पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा होगी। मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा हैं। देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है।
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने धूप-दीप और मंत्रों की गूंज के बीच मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की आराधना की। मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा तो घरों में लोगों ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।
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महानगर के सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही माता की उपासना के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। मंदिरों के आसपास स्थित दुकानों से श्रद्धालुओं ने पूजा सामग्री व प्रसाद खरीद कर मां को समर्पित किया। सुबह व शाम को मंदिरों में देवी की आरती की गई। जो श्रद्धालु प्रथम व अष्टमी का व्रत रख रहे हैं, उन्होंने सुबह मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के बाद अन्न ग्रहण किया।
आज होगी मां चंद्रघंटा की उपासना
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा होगी। मां चंद्रघंटा राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसलिए उनके हाथों में धनुष, त्रिशूल, तलवार और गदा हैं। देवी चंद्रघंटा के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र नजर आता है। बताया कि माता दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना ''ओम देवी चंद्रघंटायै नमः'' मंत्र का जाप कर करें। देवी मां को चमेली का पुष्प या लाल फूल अर्पित करें।
बेतियाहाता स्थित मंगला माता मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। माता भी किसी भक्त को निराश नहीं करती हैं और सबकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा बेल के पेड़ के जड़ों से प्राप्त हुई थी।
मंदिर के पुजारी दुर्गानाथ ने बताया कि यहां पहले जंगल था, यहीं पर एक बेल के पेड़ की जड़ों से मां की प्रतिमा की प्राप्ति हुई थी। कई वर्षो तक प्रतिमा एक कुटिया जैसे मंदिर में स्थापित रही। वर्ष 2000 में एक बूढ़ी महिला इस मंदिर की देखभाल करती थी। पास के कुछ लोगों ने यहां की जमीन पर अतिक्रमण करने की कोशिश की तो तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। इस मंदिर में काली माता, दुर्गा माता, भगवान शिव, हनुमान, गणेशजी की मूर्तियां विराजमान है। नवरात्र में यहां सुबह शाम-आरती, दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ कीर्तन आयोजित किया जाता है।
गोरखनाथ मंदिर : दोनों वक्त हो रहा दुर्गा सप्तशती का पाठ
गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया जा रहा है। मंदिर स्थित दुर्गा शक्ति पीठ पर कलश की स्थापना की गई है। दूसरे दिन मां दुर्गा की दूसरी शक्ति 'देवी ब्रह्मचारिणी' की पूजा अर्चना प्रातः गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ महाराज मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ने किया। सायंकाल की पूजा गोरक्षपीठाधीश्वर की अनुपस्थिति में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ जी ने किया। इस दौरान दो समय प्रात: व सायंकाल दुर्गा सप्तशती का पाठी वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा किया गया। सायंकाल आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर मंदिर के पुजारी और भक्त उपस्थित रहे।