जो बच्ची जन्मी थी वह अब कहां है?
डॉक्टर के इस बयान से एक बात तो साफ हो गई कि तीन जनवरी को निजी अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ था। अस्पताल से हमें उस परिवार के बारे मेें भी जानकारी मिल गई थी। लिहाजा, वहां तक पहुंचना कठिन नहीं था। गांव में जाने पर साफ हो गया है कि उस नाबालिग मां के पास अब बच्ची नहीं है।
नाबालिग, बिन ब्याही मां को तीन जनवरी की सुबह बच्ची पैदा होना और उसी दिन शाम को पोखरे किनारे एक नवजात बच्ची का मृत मिलना, सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। पुलिस को अब इन बिखरी कड़ियों को जोड़ना है। पूरी उम्मीद है कि इस जवाब के साथ, पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ जाए।
यह थी घटना
तीन जनवरी को बड़हलगंज इलाके के मिश्रौलिया गांव में पोखरे के किनारे शाम करीब 3.30 बजे एक नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 72 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम में सिर में चोट से मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, इस मामले में भाजयुमो नेता रुद्रेश तिवारी की तहरीर पर केस भी दर्ज किया गया है।
कुछ ऐसे ही हालात में पीपीगंज में मौत के घाट उतारा गया था नवजात
कथित लोकलाज बचाने के लिए, नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। पाठकों को याद होगा कि एक ऐसा ही मामला, अमर उजाला की कोशिशों से पीपीगंज मेें खुला था। 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाने ने की थी। इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ। बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली किशोरी मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था।