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अमर उजाला पड़ताल: कहीं अनैतिक संबंधों के चलते जन्मी बच्ची ही तो नहीं फेंकी गई थी पोखरे के किनारे

Tue, 11 Jan 2022 11:33 AM IST
vivek shukla शिवम सिंह\श्रीकांत शाही, गोरखपुर।

सार

बड़हलगंज में लावारिस हालत में मृत मिली नवजात बच्ची का मामला, इसी दिन गांव के पास के निजी अस्पताल में हुआ था एक बच्ची का जन्म।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : social media
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के बड़हलगंज में लावारिस मृत मिली नवजात बच्ची, कहीं अनैतिक संबंधों के चलतेे जन्मी होने की वजह से मारकर तो नहीं फेंक दी गई थी? मृत नवजात जहां मिली, उस इलाके के बच्चे-बूढ़े-जवान, सबकी जुबान पर यह सवाल है। जैसे संकेत मिले हैं, उनके मुताबिक इलाके के तमाम लोगों को मालूम है कि नवजात बच्ची किसकी थी, किन हालात में जन्मी और कैसे उसे मौत के घाट उतार दिया गया। अगर इन बातों से कोई गाफिल है तो वह है बड़हलगंज थाने की पुलिस। आखिर क्यों, उन्हें कौन रोक रहा है, कोई प्रभावशाली या उनकी अकर्मण्यता, यह लाख टके का सवाल है।

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कानूनी भाषा में बात करें तो मामले में दुष्कर्म (धारा 376 आईपीसी), हत्या (302 आईपीसी ), जन्म के पश्चात शिशु की मृत्यु कारित करना (धारा 315 आईपीसी) जैसा जघन्य अपराध किया गया है। नवजात की मां किशोरी बताई जा रही है, यानी मामला पॉक्सो का भी है। कमाल है कि बात यह है कि इतने जघन्य मामले में पुलिस की तफ्तीश, घटना के हफ्ते भर बाद भी एक इंच आगे नहीं बढ़ी है। क्षेत्र में मृत नवजात के बारे में हो रहीं चर्चा से मिले संकेतों के आधार पर अमर उजाला टीम ने सोमवार को गहरी पड़ताल की। जो तथ्य सामने आए हैं, कानून के हदों में रहकर, उसे ज्यों का त्यों पेश किया जा रहा है।

निजी अस्पताल में तीन जनवरी को जन्मी थी एक बच्ची

थोड़े ही प्रयास में अमर उजाला टीम क्षेत्र में एक नामी निजी अस्पताल तक पहुंच गई। यहां, एक बच्ची का जन्म तीन जनवरी को हुआ था। निजी अस्पताल संचालक ने प्रसव की बात मानी। बताया कि तीन जनवरी की सुबह चार बजे के करीब, उनके अस्पताल में एक नाबालिग अपनी मां के साथ आई थी। नाबालिग ने पेट में तेज दर्द की बात कही थी, मगर उसने यह नहीं बताया था कि वह गर्भवती है। दर्द का इंजेक्शन देकर मैं सोने चला गया। इसके बाद बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आंख खुली। आवाज टायलेट से आ रही थी, वहां गया तो सारा माजरा पता चला। वह कहते हैं कि हालात जैसे थे, डॉक्टर का धर्म निभाते हुए, हमने वह सब किया, जो एक डॉक्टर को ऐसे मौके पर करना चाहिए।  सामान्य प्रसव से एक स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ था।

यहां तक की पड़ताल में एक बात तो साफ हो चुकी है कि तीन जनवरी को घटनास्थल के सबसे समीप प्रसव हुआ था। अस्पताल में ये संकेत भी मिल गए कि बच्चे को जन्म देने वाली बालिग नहीं थी। यहीं यह भी पता चला कि बच्ची की मां खुद बिन ब्याही मां बनी थी। यदि इन तथ्यों की पुष्टि कर ली जाए तो साफ है कि नवजात को मारकर फेंकने के अपराध के लिए, यह परिस्थितियां एक बेहद स्ट्रांग मोटिव हैं।

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जो बच्ची जन्मी थी वह अब कहां है?

डॉक्टर के इस बयान से एक बात तो साफ हो गई कि तीन जनवरी को निजी अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ था। अस्पताल से हमें उस परिवार के बारे मेें भी जानकारी मिल गई थी। लिहाजा, वहां तक पहुंचना कठिन नहीं था। गांव में जाने पर साफ हो गया है कि  उस नाबालिग मां के पास अब बच्ची नहीं है।

नाबालिग, बिन ब्याही मां को तीन जनवरी की सुबह बच्ची पैदा होना और उसी दिन शाम को पोखरे किनारे एक नवजात बच्ची का मृत मिलना, सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। पुलिस को अब इन बिखरी कड़ियों को जोड़ना है। पूरी उम्मीद है कि इस जवाब के साथ, पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ जाए।

यह थी घटना

तीन जनवरी को बड़हलगंज इलाके के मिश्रौलिया गांव में पोखरे के किनारे शाम करीब 3.30 बजे एक नवजात बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। 72 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम में सिर में चोट से मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, इस मामले में भाजयुमो नेता रुद्रेश तिवारी की तहरीर पर केस भी दर्ज किया गया है।


कुछ ऐसे ही हालात में पीपीगंज में मौत के घाट उतारा गया था नवजात

कथित लोकलाज बचाने के लिए, नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। पाठकों को याद होगा कि एक ऐसा ही मामला, अमर उजाला की कोशिशों से पीपीगंज मेें खुला था। 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाने ने की थी। इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ। बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली किशोरी मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था।
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