गीडा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, प्लॉटों की तीन कैटेगरी है। पहली कैटेगरी प्लास्टिक पार्क की है, इसमें अब तक केवल 40 आवेदन आए हैं। दूसरी श्रेणी रेडिमेड गारमेंट की है। इसमें केवल पांच आवेदन ही आए हैं। सामान्य श्रेणी में सभी प्रकार के उद्यम के लिए प्लॉट हैं, जिसमें अब तक 100 आवेदन आए हैं। इस प्रकार तीनों कैटेगरी मिलाकर केवल 145 आवेदन आए हैं। आवेदकों की कम संख्या को देखते हुए गीडा प्रशासन ने आवेदन की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है।
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रेडिमेड गारमेंट के लिए बेहद कम आए आवेदन
पूर्वांचल के बहुत सारे कारीगर व मजदूर देश के विभिन्न शहरों में रेडिमेड गारमेंटस के निर्माण इकाइयों से जुड़े हैं। इसे देखते हुए गीडा में भी रेडिमेड गारमेंटस की यूनिट स्थापित करने के लिए अलग से प्लॉट आवंटित करने का निर्णय लिया गया, लेकिन इस श्रेणी में कम आवेदन आए हैं। हालांकि, गीडा प्रशासन ने आवेदन की तारीख बढ़ाई है, लेकिन आवेदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद कम है। इसकी एक प्रमुख वजह यह बताई जा रही कि रेडिमेड गारमेंटस में कम पूंजी वाले उद्योगपति अधिक हैं। ये लोग महंगे प्लॉट खरीदने व इकाई स्थापित करने की बजाय किराए के मकान में अपना कारोबार करने में रुचि रखते हैं।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि पहले प्लॉट आवंटन के लिए भीड़ जुटती थी, लेकिन उसके सापेक्ष उद्योग नहीं लगते थे। बाद में प्लॉट कैंसिल करने या दूसरे के नाम स्थानांतरित करने में तमाम दिक्कतें आती थीं। पिछले साल गीडा बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा की गई। तय किया गया कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी जैसे कोई सख्त नियम बनाए जाएं, जिससे वास्तविक उद्यमी ही प्लॉट के लिए आगे आएं। इसका असर भी हुआ है। इस बार जो प्लॉट आवंटित किए जा रहे हैं, उसके लिए उन्हीं लोगों ने आवेदन किया है, जो फैक्टरी लगाने के लिए उत्सुक हैं।