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गोरखपुर: ग्रेटर नोएडा की तरह प्राकृतिक गैस से चलेंगी गीडा की फैक्ट्रियां, सेक्टर-13 में बिछेगी पीएनजी की पाइपलाइन

Sun, 13 Jun 2021 10:21 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर गीडा सेक्टर-13 में बिछेगी पीएनजी की पाइपलाइन। गीडा बोर्ड ने दी मंजूरी, गैस कंपनियां शुरू करा सकेंगी काम।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा की तरह गीडा की फैक्ट्रियां भी प्राकृतिक गैस से चलेंगी। इसके लिए, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर औद्योगिक इकाइयों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। पीएनजी के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिलेगी।  
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अब तक गीडा में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन संबंधी कोई गाइडलाइन नहीं थी। इस वजह से गीडा प्रशासन को गैस पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनियों के प्रस्ताव को स्वीकृति देने में दिक्कत आ रही थी। इसको देखते हुए गीडा प्रशासन ने इस संबंध में ग्रेटर नोएडा की गाइडलाइन को लागू करने संबंधी प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखा था। जिसे गीडा बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस नीति को लागू कर दिया गया है।

गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि कुछ कंपनियों द्वारा गीडा में गैस पाइपलाइन बिछाने संबंधी अनुमति मांगी जा रही है, लेकिन गीडा के पास इस संबंध में कोई नीति नहीं होने से अनुमति नहीं दी जा पा रही थी। बोर्ड बैठक में इस संबंध में ग्रेटर नोएडा की नीति को हूबहू मान लिया गया है। ऐसे में अब कंपनियां गीडा में पाइपलाइन बिछाकर गैस की आपूर्ति कर सकेंगी।
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उठने लगे उद्यमियों के विरोध के स्वर
गीडा में पीएनजी के इस्तेमाल की अनुमति मिलने के साथ ही बोर्ड के इस फैसले पर उद्यमियों के विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पीएनजी के जरिये फैक्ट्रियों को संचालित करने को लेकर उद्यमियों के सामने न सिर्फ विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं, बल्कि इसकी उपलब्धता को लेकर अन्य राज्यों का अनुभव भी बहुत अच्छा नहीं है। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह का कहना है कि आज के समय में गीडा की अधिकांश फैक्ट्रियों के बॉयलर भूसी आदि पर आधारित हैं। ऐसे में इन फैक्ट्रियों के सामने अपने पूरे बॉयलर सिस्टम को बदलना होगा, जिसकी लागत अच्छी-खासी होगी। वहीं गैस की कीमत, गैस की आपूर्ति आदि को लेकर उद्यमियों के मन में काफी संशय है। क्योंकि गुजरात में शत-प्रतिशत फैक्ट्रियां पीएनजी से ही संचालित हैं। शुरुआत में जब फैक्ट्रियों ने इस गैस के लिए सारा सिस्टम लगा लिया तो कंपनी ने गैस की कीमत बढ़ा दी। ऐसे में गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी को इन सब चीजों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 
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