गीडा की स्थापना 1998 में हुई। 1991 से किसानों से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हुई। वहीं 1993 से औद्योगिक प्लॉटों का आवंटन शुरू किया गया। गीडा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना से लेकर 2020 के तकरीबन 30 साल के दौरान गीडा को 51 सीईओ मिले।
तीन दशक के दौरान उद्योगों को स्थापित कराने में गीडा प्रशासन में बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखाई गई। जिसकी वजह से स्थिति यह है कि आवंटित प्लॉटों में मात्र 60 प्रतिशत पर ही उद्योग चल पा रहे हैं। अब भी तकरीबन 40 प्रतिशत प्लॉट ऐसे हैं, जो खाली पड़े हुए हैं।
गीडा सीईओ संजीव रंजन ने बताया कि गीडा में संचालित सभी फैक्ट्रियों का सर्वे करवाया जा रहा है। बहुत सारे प्लॉट खाली भी हैं। जिन उद्यमियों द्वारा प्लॉटों के आवंटन में नियम और शर्तों का पालन नहीं किया गया है, उनमें से पांच या छह का आवंटन निरस्त किया गया है।
अन्य की जांच की जा रही है। जिन उद्यमियों द्वारा गीडा के नियम शर्तों का पालन नहीं किया गया है उनके प्लॉट को निरस्त करते हुए उनकी जमानत राशि जप्त की जाएगी।