क्षेत्र के तत्कालीन सांसद व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर मिल चलाने की मंजूरी तो मिल गई मगर एक सीजन चलने के बाद मिल फिर से 1999 में बंद हो गई।
मजदूर नेता सीताराम पांडेय कहते हैं कि घुघली मिल बंद होने से क्षेत्र का विकास थम गया। गन्ने की खेती से किसानों को मोह भंग हो गया। जब चीनी मिल संचालित था तो काफी रौनक रहती थी। अब आसपास के व्यापारी किसी तरह व्यवसायिक गाडी को खीच रहे हैं।
चीनी मिल का फैक्ट फाइल
- स्थापना वर्ष -1920
- भूमि- 52 एकड़
- बंद हुई -31 अक्टूबर 1999
- बिक्री- 2012
- कीमत- 3075 करोड़
- खरीददार-जिरकाम शुगर सालूसन
- बंदी के समय कर्मचारियों की संख्या-928