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कभी महराजगंज की पहचान हुआ करती थी यह चीनी मिल, अब यादों में है सीमित

Sat, 30 May 2020 10:30 AM IST
vivek shukla विवेक जायसवाल, महराजगंज।

सार

  • चीनी मिल से आर्थिक, राजनैतिक व्यापारिक रूप से सेहत मंद हुआ था घुघली
  • तत्कालीन सांसद और अब के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर चली थी बंद चीनी मिल
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घुघली चीनी मिल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महराजगंज के क्षेत्रवासियों की लाइफ लाइन घुघली चीनी मिल आज यादों में सिमट कर रह गई है। मिल गेट के सामने से होकर गुजरने वाले हर शख्स की नजर मिल पर पड़ती है तो ठहर जाता है।

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कभी घुघली कस्बा चीनी मिल शुरू होने पर आर्थिक, राजनैतिक व कृषि क्षेत्र में सेहतमंद हुआ करता था। लेकिन अब तो लोग भूली बिसरी यादों को साझा कर मन को तसल्ली देते हैं।

घुघली चीनी मिल की स्थापना पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में किया था। इसे पंजाब शुगर मिल के नाम से जाना जाता था। मिल की स्थापना के बाद घुघली राजनैतिक, व्यापारिक, कृषि क्षेत्र सेहतमंद हुआ।
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मिल की वजह से इस कस्बे को एक पहचान मिली। मजदूरों को रोजगार मिला। साथ ही किसानों को गन्ने की खेती करने में रूची हुई। लंबे अरसे तक यह चीनी मिल किसानों एवं क्षेत्रवासियों को फायदा पहुंचाता रहा। लेकिन वक्त बितने के साथ ही वर्ष 1997-98 में फायदे के बावजूद मिल बंद करने की घोषणा कर दी गई।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर मिल चलाने की मिली थी मंजूरी

क्षेत्र के तत्कालीन सांसद व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर मिल चलाने की मंजूरी तो मिल गई मगर एक सीजन चलने के बाद मिल फिर से 1999 में बंद हो गई।

मजदूर नेता सीताराम पांडेय कहते हैं कि घुघली मिल बंद होने से क्षेत्र का विकास थम गया। गन्ने की खेती से किसानों को मोह भंग हो गया। जब चीनी मिल संचालित था तो काफी रौनक रहती थी। अब आसपास के व्यापारी किसी तरह व्यवसायिक गाडी को खीच रहे हैं।

चीनी मिल का फैक्ट फाइल
  • स्थापना वर्ष -1920
  • भूमि- 52 एकड़
  • बंद हुई -31 अक्टूबर 1999
  • बिक्री- 2012
  • कीमत- 3075 करोड़
  • खरीददार-जिरकाम शुगर सालूसन
  • बंदी के समय कर्मचारियों की संख्या-928
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