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BRD Gorakhpur: एमआरआई के लिए मिल रहा एक माह बाद का नंबर, मरीज परेशान

Sat, 04 Jun 2022 02:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर दिन लौटाए जा रहे 40 से 45 मरीज, सिर्फ 15 से 16 मरीजों का ही हो पा रही एमआरआई।

 
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BRD Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ये दो केस महज बानगी हैं। हर दिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई कराने आने वाले 50 से 60 मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। इन मरीजों को एक से डेढ़ माह बाद एमआरआई के लिए बुलाया जा रहा है।

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एमआरआई कराने वाले मरीजों की वेटिंग इतनी लंबी है कि मजबूरी में परिजन अपने मरीजों को निजी सेंटर पर लेकर जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, एमआरआई उन्हीं मरीजों को सलाह दी जाती है, जिन्हें चलने फिरने में दिक्कत होती है या फिर न्यूरो से संबंधित समस्याएं होती हैं।

ऐसी स्थिति में अगर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के भरोसे यह मरीज रहेंगे तो मर्ज खत्म होने के बजाए उनका दर्द और बढ़ा देगी। ऐसी स्थिति में मजबूरी में मरीज निजी सेंटर पर पहुंचकर एमआरआई करा रहे हैं। इसके बदले उन्हें अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
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बीआरडी में 2,500 और बाहर 4,500 रुपये में एमआरआई
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को एमआरआई के लिए 2,500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि, निजी सेंटरों पर इसके लिए 4,500 रुपये देने पड़ते हैं। प्रतिदिन बीआरडी से 30 से 35 मरीज बाहर से एमआरआई कराते हैं। इसके लिए निजी सेंटरों के कुछ लोग बीआरडी एमआरआई सेंटर के पास पूरे दिन रहते हैं। ये लोग ऐसे मरीजों को तत्काल जांच कराने के नाम पर बाहर ले जाते हैं और एमआरआई कराते हैं। मजबूरी में मरीज और उनके तीमारदार जांच के लिए जाते भी हैं।

बीआरडी में प्रतिदिन 15 से 16 एमआरआई हो रही
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एमआरआई सेंटर के कर्मियों ने बताया कि एक एमआरआई में 40-45 मिनट का वक्त लगता है। ऐसी स्थिति में प्रतिदिन 15-16 एमआरआई ही हो पाती है। जबकि, 65-70 मरीज एमआरआई के लिए आते हैं।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीज इमरजेंसी में इलाज के लिए आते हैं। इनमें 70 फीसदी मरीजों के सिर में चोट लगने की शिकायत होती है। ऐसी स्थिति में इमरजेंसी के मरीजों का प्राथमिकता के आधार पर एमआरआई होता है। इसलिए सामान्य मरीजों के एमआरआई में समय लगता है।

केस- एक
देवरिया के रहने वाले चंदन, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी में इलाज कराने पहुंचे। डॉक्टर ने चंदन को एमआरआई कराने की सलाह दी। कॉलेज के एमआरई सेंटर पहुंचे तो पता चला कि 29 जुलाई तक वेटिंग है। इसके बाद ही एमआरआई हो पाएगा।

केस-दो
कुशीनगर की माया देवी पति श्याम मोहन का इलाज बीआरडी में करवा रही हैं। डॉक्टरों ने एमआरआई की सलाह दी है। वह एमआरआई सेंटर पहुंचीं तो उन्हें जुलाई में एमआरआई की डेट मिली। मजबूरी में आशा ने निजी अस्पताल में एमआरआई कराई।
 
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