खलीलाबाद-बहराइच रेल लाइन के लिए ड्रोन आधारित लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंगलेडार (लेडार) सर्वे होगा। इससे 240 किमी लंबी रेल लाइन को बिछाने का खाका तैयार करने में मदद मिलेगी। सर्वे दिसंबर तक पूरा होगा और इसमें साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लेडार सर्वे से नदी, खेत, मोड़ सभी की थ्री डायमेंशनल तस्वीरें मिल जाएंगी। जिसके आधार पर मिट्टी, गिट्टी, स्टेशन, यार्ड आदि के निर्माण में कितना मैटेरियल लगेगा और कहां-कितनी लागत आएगी, इसका आकलन किया जाएगा। सर्वे से यह भी पता चलेगा कि रेल लाइन कितनी ऊंचाई पर बनाई जाए। रेलवे स्टेशनों की लंबाई और चौड़ाई कितनी हो। सर्वे के बाद रेलवे ट्रैक बिछाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे पंकज कुमार सिंह ने कहा कि खलीलाबाद-बहराइच रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण की किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न जानकारियां एकत्र करने के लिए आधुनिक तकनीकी युक्त लेडार सर्वे करने किया जाएगा। इसके लिए टेंडर नोटिस जारी किया गया है।
इस वर्ष 263 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण
नई रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वित्तीय वर्ष में खलीलाबाद-बांसी के बीच 263 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी रेल लाइन बिछाने के लिए 1174 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसके लिए श्रावस्ती व बहराइच में भी प्रक्रिया चल रही है।
2025 तक कार्य पूरा करने का है लक्ष्य
खलीलाबाद से शुरू होकर मेंहदावल, डुमरियागंज, उतरौला, श्रावस्ती, भिनगा और बहराइच तक 240 किमी लंबी रेल लाइन को पूरा करने के लिए वर्ष 2025 तक का लक्ष्य निर्धारित है। केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2018 में इस रेल लाइन की मंजूरी दी थी। सरकार ने 4940 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित कर दिया है।
इन जिलों को फायदा
संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती।
फैक्ट फाइल
लंबाई- 240 किमी
लागत- 4940 करोड़
स्टेशन- 20
हाल्ट स्टेशन- 12
महत्वपूर्ण पुल- 02
बड़े पुल- 32
छोटे पुल- 86