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यादगार होगा गीता प्रेस का शताब्दी वर्ष, सालभर होंगे कार्यक्रम

Sun, 31 Jan 2021 03:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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गीता प्रेस - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के गीता प्रेस की स्थापना का शताब्दी वर्ष यादगार होगा। इसे महोत्सव के रुप में सालभर धूमधाम से मनाया जाएगा। गीता प्रेस के ट्रस्टियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शताब्दी वर्ष के सालभर के आयोजन की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। गीता प्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल व नारायण प्रसाद अजितसरिया, उत्पाद प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी शुक्रवार को मुख्यमंत्री को कल्याण का विशेषांक गणेश पुराण भेंट करने के लिए लखनऊ पहुंचे थे।
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लखनऊ से आने के बाद उत्पाद प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने बताया कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि गीता प्रेस की स्थापना 23 अप्रैल 1923 को हुई थी। ऐसे में प्रेस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। यह जानकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि को महोत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए। इसे लेकर वर्ष भर आयोजन होते रहने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अभी से कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही आश्वस्त किया कि कार्ययोजना के आधार आयोजनों में जिस भी अतिथि को आमंत्रित करना होगा, वह उसमें मदद करेंगे।

डॉ. तिवारी ने बताया कि 10 दिसंबर 2019 में जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में हिस्सा लेने गोरखपुर आए थे, तो उन्होंने भी शताब्दी वर्ष को पूरे उत्साह के साथ मनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द शताब्दी वर्ष समारोह की कार्ययोजना तैयार करके उसकी प्रस्तुति मुख्यमंत्री के सामने की जाएगी।
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मार्च में कोमोरी मशीन का उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री

ट्रस्टियों ने मुख्यमंत्री को भेंट किया कल्याण का विशेषांक। - फोटो : अमर उजाला।
गीता प्रेस के ट्रस्टियों ने मुख्यमंत्री से जापान से आने वाली अत्याधुनिक कोमोरी प्रिंटिंग मशीन के आने और उसके उद्घाटन को लेकर भी चर्चा की। उत्पाद प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उद्घाटन के लिए सहमति दी है।

ऐसे हुई गीताप्रेस की स्थापना
गोरखपुर में गीताप्रेस की स्थापना की कहानी रोचक व प्रेरित करने वाली है। वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट के तहत वहीं से वह गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 1923 में उर्दू बाजार में दस रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीता प्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली। 29 अप्रैल 1955 को भारत के तत्कालीन व प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गीता प्रेस भवन के मुख्य द्वार व लीला चित्र मंदिर का उद्घाटन किया था।
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