गोरखपुर। ‘वैदिक सिटी’ परियोजना को गति देने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने भूमि जुटाने की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब तक अनिवार्य भूमि अधिग्रहण के सहारे आगे बढ़ रही इस योजना में अब लैंड पूलिंग मॉडल को भी शामिल कर लिया गया है। इसका उद्देश्य परियोजना को तेजी से धरातल पर उतारना और किसानों को विकास का हिस्सा बनाना है।
जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने मंगलवार को प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ प्रस्तावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि भूमि प्राप्ति की प्रक्रिया केवल अधिग्रहण तक सीमित न रहे बल्कि सहमति आधारित विकल्पों को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अर्जन अनुभाग को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए अनिवार्य भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है लेकिन अब जीडीए का फोकस इस बात पर है कि भूमि मालिकों को सीधे विकास प्रक्रिया से जोड़ा जाए। लैंड पूलिंग व्यवस्था में किसान अपनी भूमि परियोजना के लिए देते हैं और बदले में विकसित भूखंड या अन्य लाभ प्राप्त करते हैं। इससे न केवल विवाद की आशंका घटती है बल्कि विकास कार्यों की गति भी तेज होती है।
मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत विकसित होने वाली यह वैदिक सिटी लगभग 251.89 हेक्टेयर क्षेत्र में आकार लेगी। इसके लिए गोरखपुर-कुशीनगर मार्ग से जुड़े तीन गांव माड़ापार (चौरीचौरा क्षेत्र), तकिया मेदनीपुर और कोनी चिह्नित किए गए हैं। इन गांवों में क्रमशः 151.261, 44.076 और 56.482 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है। जीडीए का लक्ष्य इस परियोजना को केवल एक आवासीय योजना तक सीमित न रखकर भविष्य के एक सुव्यवस्थित, टिकाऊ और सांस्कृतिक पहचान वाले शहरी मॉडल के रूप में विकसित करना है।