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रामगढ़ताल क्षेत्र: जीडीए के ग्रीन सेस लगाने की तैयारी पर लग सकता है ब्रेक, जानिए क्या है वजह

Sat, 26 Jun 2021 08:57 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

विजन यूपी 2030 संस्था ने कई तर्कों के साथ लगाई आपत्ति, फैसला अगली बोर्ड बैठक में।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामगढ़ताल क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत कराने के दौरान ग्रीन सेस (हरित अधिभार) वसूले जाने की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की तैयारी पर ब्रेक लग सकता है। यह अतिरिक्त शुल्क कितना लगाया जाए, इसके आकलन के लिए प्राधिकरण ने एक कमेटी बनाई थी। साथ ही आपत्तियां और सुझाव भी मांगे थे।
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विजन यूपी 2030 नामक संस्था ने ग्रीन सेस पर कई नियमों, तर्कों के साथ आपत्ति दर्ज कराते हुए, इस प्रस्ताव पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। कमेटी दो जुलाई को प्रस्तावित जीडीए बोर्ड बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। बोर्ड, सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही कोई निर्णय लेगा।  

बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) से राहत मिलने एवं वेटलैंड का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद रामगढ़ताल क्षेत्र में 50 मीटर परिधि के बाहर मानचित्र स्वीकृत करने का रास्ता साफ हो गया है। मगर 10 मार्च 2021 को हुई जीडीए की 118वीं बोर्ड बैठक में इस क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत करने पर ग्रीन सेस लगाने का प्रस्ताव पास किया गया था।
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इस पर विजन यूपी 2030 संस्था ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संस्था ने जीडीए एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से पूर्व में लगाए गए पार्क शुल्क जैसे अधिभार को हाईकोर्ट से समाप्त करने के आदेश का उल्लेख किया है। तर्क है कि नेशनल लेक कंजर्वेशन प्लान के जरिए पहले से ही रामगढ़ताल के सुंदरीकरण के लिए मदद की जा रही है, ऐसे में अधिभार कहां तक उचित है ? संस्था का सुझाव है कि यदि जीडीए अधिभार लगाना ही चाहता है तो इसे किस नियम के तहत लगाया जा रहा है, इसका भी उल्लेख किया जाना चाहिए। इन तथ्यपरक आपत्तियों के बाद माना जा रहा है कि अधिभार लगाने का फैसला वापस भी हो सकता है।
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क्षेत्रीय पार्क, विनियमितिकरण मसले पर भी जताई आपत्ति

जीडीए की पिछली बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया था कि रामगढ़ ताल परिक्षेत्र में क्षेत्रीय पार्क का क्षेत्रफल न तो कम किया जाएगा और न ही परिवर्तित किया जाएगा। संस्था की ओर से इस बिंदु पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि पहले इस तरह के भूखंडों पर मानचित्र स्वीकृत किए गए हैं। संस्था ने उनके भविष्य पर सवाल खड़ा किया है। बोर्ड बैठक में यह भी तय किया गया था कि रामगढ़ ताल से 500 मीटर परिधि के भीतर अवैध निर्माण का विनियमितीकरण नहीं किया जाएगा। इस बिंदु पर आपत्ति जताते हुए संस्था ने कहा है कि वेटलैंड के नोटिफिकेशन में विनियमित किए जाने वाले प्रसंगों की सूची जारी हुई है। संस्था का कहना है कि इस फैसले से नोटिफिकेशन के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।

प्रचार-प्रसार हुआ तो बढ़ सकती है आपत्तियों की संख्या
ग्रीन सेस समेत कुछ अन्य मामलों में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जीडीए ने कुछ समय पहले नोटिफिकेशन जारी किया था। माना जा रहा है कि इस नोटिफिकेशन का बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार नहीं हो पाया था। इसे वेबसाइट पर डाल दिया गया था। ऐसे में कुछ जागरूक लोग ही इसे देख पाए और एक संस्था ने आपत्तियां दर्ज कराईं। यदि प्रचार-प्रसार होता तो तमाम लोगों से जुड़े इस मसले में आपत्तियों की संख्या और बढ़ती।

जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि रामगढ़ताल क्षेत्र को लेकर पिछली बोर्ड बैठक में लिए गए फैसले पर आपत्तियां एवं सुझाव मांगे गए थे। एक संस्था ने मेल से सुझाव भेजे हैं। उसका जिक्र करते हुए कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसे अगली बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। 
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