रामगढ़ताल क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत कराने के दौरान ग्रीन सेस (हरित अधिभार) वसूले जाने की गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की तैयारी पर ब्रेक लग सकता है। यह अतिरिक्त शुल्क कितना लगाया जाए, इसके आकलन के लिए प्राधिकरण ने एक कमेटी बनाई थी। साथ ही आपत्तियां और सुझाव भी मांगे थे।
विजन यूपी 2030 नामक संस्था ने ग्रीन सेस पर कई नियमों, तर्कों के साथ आपत्ति दर्ज कराते हुए, इस प्रस्ताव पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। कमेटी दो जुलाई को प्रस्तावित जीडीए बोर्ड बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। बोर्ड, सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही कोई निर्णय लेगा।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) से राहत मिलने एवं वेटलैंड का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद रामगढ़ताल क्षेत्र में 50 मीटर परिधि के बाहर मानचित्र स्वीकृत करने का रास्ता साफ हो गया है। मगर 10 मार्च 2021 को हुई जीडीए की 118वीं बोर्ड बैठक में इस क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत करने पर ग्रीन सेस लगाने का प्रस्ताव पास किया गया था।
इस पर विजन यूपी 2030 संस्था ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संस्था ने जीडीए एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से पूर्व में लगाए गए पार्क शुल्क जैसे अधिभार को हाईकोर्ट से समाप्त करने के आदेश का उल्लेख किया है। तर्क है कि नेशनल लेक कंजर्वेशन प्लान के जरिए पहले से ही रामगढ़ताल के सुंदरीकरण के लिए मदद की जा रही है, ऐसे में अधिभार कहां तक उचित है ? संस्था का सुझाव है कि यदि जीडीए अधिभार लगाना ही चाहता है तो इसे किस नियम के तहत लगाया जा रहा है, इसका भी उल्लेख किया जाना चाहिए। इन तथ्यपरक आपत्तियों के बाद माना जा रहा है कि अधिभार लगाने का फैसला वापस भी हो सकता है।