गोरखपुर के मानबेला के सैकड़ों काश्तकारों के लिए राहत भरी खबर है। उनकी मांग के अनुरूप अब बढ़ी दर पर मुआवजा मिलने की राह पूरी तरह खुल गई है। जनपद न्यायाधीश न्यायालय की तरफ से किसानों के पक्ष में फैसला होने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने न्यायालय में तीन करोड़ 60 लाख 83 हजार रुपये जमा कर दिए हैं। उधर, जनपद न्यायाधीश न्यायालय के आदेश के ही आधार पर मानबेला के और 157 काश्तकारों ने एसएलओ कार्यालय में आवेदन किया है।
करीब चार महीने पहले ही मानबेला के 69 काश्तकारों से जुड़ी एक रिट पर सुनवाई करते हुए जनपद न्यायाधीश ने उनके पक्ष में फैसला किया था। इसमें ब्याज और अन्य देय समेत मुआवजे की रकम देने का आदेश दिया गया है। जीडीए को यह रकम न्यायालय में जमा करने को कहा गया था। इस आदेश के बाद प्राधिकरण ने शासन से विधिक राय मांगी थी। मार्गदर्शन मिलने के बाद रकम न्यायालय में जमा भी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि काश्तकारों को अब करीब 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर के हिसाब से मुआवजा मिलेगा।
सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री ने लंबे समय तक लड़ी थी काश्तकारों की लड़ाई
मुआवजा बढ़ाने की मांग के संबंध में कई वर्षों से चल रही काश्तकारों की लड़ाई को सांसद रहते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही बल दिया था। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने मानबेला के काश्तकारों का मामला सुलझाने के लिए पहल शुरू कर दी। साल 2017 में योगी के निर्देश पर काश्तकारों और जीडीए के बीच समझौते के लिए कमेटी बनाई गई। कमेटी ने 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का निर्णय दिया था। किसान इस पर सहमत थे, मगर जीडीए ने बाद में इसमें ब्याज का पेंच लगा दिया। प्राधिकरण का कहना था कि पूर्व में तय मुआवजे की दर से अधिक जो भी रकम किसानों को दी जाएगी उस पर ब्याज काटा जाएगा।
काश्तकार, इस पर सहमत नहीं हुए। उन्होंने जनपद न्यायाधीश न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। उधर मानबेला के एक किसान मो. शमीम ने पूर्व में अधिग्रहण के समय तय दर पर ही भुगतान करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इससे काश्तकारों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई थी मगर बाद में उन्होंने केस वापस ले लिया। इधर, अब जनपद न्यायाधीश ने काश्तकारों के पक्ष में फैसला करते हुए ब्याज समेत बढ़ा हुआ मुआवजा कोर्ट में जमा करने का आदेश जीडीए को सुनाया ताकि किसानों में उसे वितरित किया जा सके।
अधिग्रहण के समय 18 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर था मुआवजा
जीडीए ने मानबेला में करीब 215 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की है। वर्ष 2009 में यह अवार्ड हुआ। उस समय प्राधिकरण ने 18 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा तय किया था। बाद में इसे बढ़ाकर 28 लाख रुपये किया गया। करीब 400 काश्तकारों को 18 लाख की दर पर मुआवजा मिला, जबकि 100 किसानों को करार के तहत 28 लाख रुपये की दर पर दिया गया। मगर किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे थे। उनके विरोध की वजह से जीडीए कोई परियोजना नहीं संचालित कर पा रहा था। मुख्यमंत्री की पहल पर समझौते के बाद मुआवजे की दर 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर करने पर सहमति बनी, मगर जीडीए ने मुआवजे में पेच फंसा दिया। जिस पर करीब 70 काश्तकार ने जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी।
जो कोर्ट नहीं गए उन्हें भी मिलेगा मुआवजा
ब्याज का मामला फंसने पर करीब 70 काश्तकारों ने जनपद न्यायाधीश के कोर्ट में रिट दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने जीडीए को ब्याज समेत करीब 71 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से कोर्ट में मुआवजे की राशि जमा करने का आदेश सुनाया है। मगर जो किसान कोर्ट नहीं गए उन्हें भी बढ़े हुए मुआवजे का लाभ मिल सकेगा। इसके लिए उन्होंने भू-अधिग्रहण की धारा 28 ए के तहत एसएलओ दफ्तर में प्रार्थनापत्र भी दे दिया है।
जीडीए सचिव राम सिंह ने बताया कि जनपद न्यायाधीश न्यायालय के आदेश पर जीडीए की तरफ से तीन करोड़ 60 लाख 83 हजार रुपये रुपये न्यायालय में जमा करा दिए गए हैं। संबंधित काश्तकारों को न्यायालय से ही बढ़े हुए दर पर मुआवजा मिलेगा। न्यायालय के आदेश के ही आधार पर 157 और काश्तकारों ने एसएलओ दफ्तर में बढ़े हुए मुआवजे के लिए आवेदन किया है।