प्रथम सत्र के छात्रों को यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताकर पंजीकरण कराया गया। बाद में स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताया जा रहा है। पता चला कि संस्था की मान्यता नहीं है। कूटरचित दस्तावेज पर मान्यता ली गई है। सीएमओ की जांच में इसकी पुष्टि हुई थी। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। पुलिस ने मामले में पिपराइच थाने में केस दर्ज किया था।
डॉ. अभिषेक पर 20 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें लखनऊ के हुसैनगंज में भी दर्ज मुकदमा शामिल है। गोरखपुर में वर्ष 2016 में दर्ज 14 मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लग गई थी, जिसे फिर से खोला गया था। मई 2022 में तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सभी मुकदमों की जांच कराकर एक ही दिन चार्जशीट दाखिल कराई थी। इसके बाद गैंगस्टर का ग्राउंड तैयार हो गया था। बाद में गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की गई।
इन संपत्तियों को किया गया कुर्क
- जटेपुर उत्तरी स्थित आवास
- जंगल नकहा नंबर दो स्थित राज गोशाला
- हुमायूंपुर स्थित राज नर्सिंग होम, हॉस्टल
- जंगल अहमद शाह अली उर्फ तुर्रा स्थित राज नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेज
- दो कार, चार स्कूल बस, एक माल वाहन, दो बाइक
- डॉ. मनीषा यादव के तीन खाते, डॉ. अभिषेक के दो, राज शिक्षण प्रशिक्षण सेवा समिति के सात खाते, स्व. डॉ. राजाराम जिसके नामिनी डॉ. अभिषेक के तीन, राज कुमारी के चार खाते जिसके नामिनी डॉ. अभिषेक यादव हैं।