पुलिस के मुताबिक, गैंग का सरगना रिजवान स्वयं व अपने गिरोह के अन्य चार सदस्यों के साथ मिलकर आर्थिक, भौतिक फायदे के लिए सामूहिक गिरोह चलाता है। गिरोह के लोग मरीजों को बरगला कर सरकारी अस्पताल से नर्सिंग होम पहुंचा देते हैं। कई मरीजों की गलत इलाज से मौत जाती है तो वहीं कई नर्सिंग का बिल भरने में बर्बाद हो जाते हैं। डीएम के अनुमोदन के बाद पुलिस ने गैंगस्टर का केस दर्ज कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक, सत्यम नर्सिंग होम में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की तो मरीज, एंबुलेंस और फिर खून माफिया का सच सामने आ गया। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी कई चेहरे बेनकाब हो गए। कोई खुद को पोर्टल का पत्रकार बताकर इस धंधे में लगा था, कोई आठवीं पास होने के बाद भी डॉक्टर बन गया था।
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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि पुलिस ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर मरीज की खरीद-फरोख्त करने वाले पांच एंबुलेंस माफिया पर कार्रवाई की थी। अब इन पर गैंगस्टर का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है। पुलिस जल्द ही इनके अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्तियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज करने की कार्रवाई भी करेगी।