इसके जरिए नए पंजीकृत व्यापारी द्वारा हाई वैल्यू (40 लाख रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री) के ई-वे बिल बनाने और उसके उपयोग की जांच होती है। इसके अलावा नाॅन फाइलर (अपंजीकृत) के टर्नओवर की समीक्षा करते हुए रिटर्न दाखिल करने के साथ देय राजस्व जमा हुआ या नहीं, इस पर भी निगाह रहती है। इन नियमों का पालन नहीं करने वाली फर्म भी एआई के निशाने पर आ जाती हैं।
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एडिश्नल कमिश्नर (ग्रेड टू) ने बताया कि व्यापारी नियमानुसार पंजीकरण करवाने के साथ ई-वे बिल और नियमों के साथ व्यापार करें। एआई के जरिए मिलने वाले डाटा पर एसआईबी की टीम निगरानी करेगी। फर्जी फर्मों की जांच अभियान चलाकर की जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने वाले व्यापारियों पर जुर्माने के साथ फर्म के अपंजीकृत होने का खतरा बना रहेगा।