गोरखपुर/ कुशीनगर। सिपाही ने मासूम बच्ची के अपहरण और दरिंदगी के बाद हत्या की घटना का अंजाम देकर खाकी पर जो दाग लगाया था उसे धुलने के लिए पुलिस महकमे ने मानवीय संवेदना के तहत मदद को हाथ बढाए। गोरखपुर में एसएसपी ने सख्ती की और आपराधिक विवादों में घिरे 45 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। लेकिन, अब कुशीनगर में युवती को जबरन गाड़ी में बैठाकर गलत हरकत करने वाले सिपाहियों ने एक बार खाकी के दामन को दागदार कर दिया है।
बात करें कुशीनगर की तो पुलिस पर एक वर्ष के दौरान कई गंभीर आरोप लगे हैं। तस्करी, रिश्वतखोरी, छेड़खानी, मारपीट, वसूली जैसे भ्रष्टाचार के मामलों में दस से अधिक सिपाही-दरोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। कई मामलों में पुलिसकर्मी जेल भी जा चुके हैं।
करीब तीन माह पूर्व रामकोला थाने पर तैनात सिपाही सूरज गिरी, विनोद, जितेंद्र पाल और नितेश कुमार के खिलाफ गांजा तस्करी कराने की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उस मामले में सूरज गिरी और नितेश जेल भेज दिए गए थे, बाकी दो सिपाही भाग निकले थे। इसके अलावा तरयासुजान थाने पर तैनात दरोगा आलोक सिंह पर विवेचना से नाम निकलवाने के के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज है।
वही, गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी में पशु तस्करों ने विरोध करने पर एक युवक की हत्या कर दी थी। पूरे प्रदेश में यह मामला गूंजा था। जांच में कसया थाने पर तैनात इंस्पेक्टर अमित शर्मा, तमकुहीराज थाने पर तैनात सुशील शुक्ला समेत हाईवे के थाने और चौकी पर तैनात 26 दरोगा-सिपाहियों पर कार्रवाई हुई थी।
एसपी केशव कुमार का कहना है कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के प्रति विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति है। दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।