खास बात यह है कि इसका सक्सेस रेट भी 20 प्रतिशत तक है। यह किफायती तकनीक है। इसे तीन से चार बार तक प्रयास किया जा सकता है। जिन दंपतियों के विवाह के अधिकतम 6 वर्ष हुए हों और महिला की उम्र 35 वर्ष से कम हो तो उसमें सक्सेस रेट अधिक होता है।
प्राचार्य डॉ. रामकुमार ने बताया कि भाग दौड़ भरी जिंदगी और देर से हो रही शादी के कारण बांझपन के मामले बढ़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में ऐसे दंपति को पूरी तरह इलाज मुहैया कराने के लिए इस केंद्र की शुरुआत की गई है। भविष्य में इसका और भी विस्तार होना है।
इस दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूमा सरकार, डॉ. शिखा मुखीजा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. राधा जीना, डॉ. नीला राय शर्मा, डॉ. वाणी आदित्य, डॉ. रीता सिंह, डॉ. सुधीर गुप्ता, डॉ. खुतैजा बानो आदि मौजूद रहीं।
पहले दिन 25 दंपत्तियों को किया गया आईयूआई
उद्घाटन सत्र के बाद पहले दिन ही प्रायोगिक सत्र भी आयोजित किया गया। प्रतिभागी जूनियर डॉक्टरों को सीमन एनालिसिस, स्पर्म प्रीपरेशन, अल्ट्रासाउंड आदि की जानकारी दी गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. रूमा सरकार ने बताया कि पहले दिन 25 दंपत्तियों का सफल आईयूआई किया गया। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा पूरी तरह से नि:शुल्क है, जबकि निजी अस्पतालों में इसका खर्च काफी महंगा होता है।