गोरखपुर जिले में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में डेंगू के ज्यादा मामले आने से घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग की सर्विलांस टीम इस पर नजर रखे हुए है। बुखार होने पर लोग जागरूक होकर अस्पताल जा रहे हैं और जांच करवा रहे हैं। इसकी वजह से मामले ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। यह एक बेस्ट प्रैक्टिस है। डेंगू की समय से पहचान और इलाज होने से लोग जल्द ठीक हो रहे हैं। ऐसे में इसके लक्षण दिखते ही तत्काल जांच कराएं।
यह अपील सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने जिलेवासियों से की है। सीएमओ ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग खुद के प्रयास से डेंगू मरीजों को ढूंढने में लगा है। इससे बीमारी के प्रसार में कमी आएगी और मरीज का समय से इलाज हो सकेगा। डेंगू मरीज की पहचान समय से न होने खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर डेंगू के लक्षण दिखें तो तत्काल सरकारी अस्पताल में जाकर निशुल्क जांच कराएं। कहा कि पूरे बाजू के कपड़े पहने, मच्छर अगरबत्ती और मच्छरदानी का प्रयोग करें, साफ पानी एकत्र न होने दें।
तीन हजार से अधिक की रैपिड किट से हुई जांच
सीएमओ ने बताया कि सरकारी अस्पतालों पर करीब 3,000 से अधिक लोगों की डेंगू की जांच एनएसवन रैपिड टेस्ट से की गई है। लक्षणों के आधार पर 1,500 से अधिक लोगों का एलाइजा कंफर्मेट्री टेस्ट भी कराया गया। बताया कि सरकारी अस्पतालों पर जांच किट उपलब्ध है। डेंगू के लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराएं। रैपिड टेस्ट होने के बाद एलाइजा टेस्ट के लिए सैंपल दे सकते हैं।
एडीज प्रजाति के मच्छरों से होता है प्रसार
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह का कहना है कि डेंगू का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खास एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से ही होता है। यह मच्छर सामान्य तौर पर दिन में काटते हैं और ठहरे हुए साफ पानी में ही पनपते हैं। मधुमेह के मरीजों और गर्भवती को खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।
डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, डायरिया।