किसी भी नई व्यवस्था के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीके सिंह कहते हैं कि किस भी नई व्यवस्था के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी होता है। अपने यहां प्रायः इसकी अनदेखी होती है। किसी भी जीव के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए उचित माहौल बेहद जरूरी होता है। मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें पक्षियों क सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। इससे इनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। जटायु काफी बड़े आकार के पक्षी होते हैं, उन्हें अगर खुला माहौल मिले तो ज्यादा अच्छा विकास दिखेगा।
पारसियों के अंतिम संस्कार में आ रही मुश्किल
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. चंद्र मोहन नौटियाल कहते हैं कि मौजूदा माहौल में जटायु का संरक्षण बड़ी चुनौती है। जटायु की घटती संख्या से बढ़ती मुश्किलों पर वह पारसी समुदाय के टावर ऑफ साइलेंस का जिक्र करते हैं। डॉ. नौटियाल कहते हैं कि पारसी समुदाय में किसी की मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर टावर ऑफ एक्सीलेंस पर रख दिया जाता रहा है। जटायु उस शरीर को खत्म कर देते थे। इनकी तेजी से घटी तादाद ने पारसी समुदाय को मुश्किलों में डाल दिया है। ऐसे में और ज्यादा जटायु संरक्षण केंद्र शुरू किए जाने की आवश्यकता है।
वन्य जीव संरक्षण के नए नियमों के मुताबिक पक्षियों को किसी केंद्र में रखने के लिए सीजेडए की अनुमति जरूरी है। नए जटायु लाने के लिए सीजेडए में आवेदन किया गया है, मंजूरी का इंतजार है। वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय से जटायु केंद्र में पक्षियों को दिक्कत न हो इसके लिए साउंड विश्वविद्यालय के लेआउट में भी जटायु केंद्र की तरफ के हिस्से में ग्रीन बैरियर लगाए जाएंगे। बेल्ट की योजना शामिल है। - शुभम सिंह, डीएफओ, गोरखपुर