उत्तर प्रदेश राज्य आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास नए साल पर होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीएम आफिस के ट्वीटर हेंडल से जानकारी दी गई है कि सीएम ने प्रस्तावित उप्र राज्य आयुष विश्वविद्यालय में महाविद्यालयों की संबद्धता एवं अन्य प्रशासनिक कार्य सत्र 2021-22 से एवं विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य सत्र 2022-23 से प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
सीएम ने 20 नवंबर को लखनऊ में आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को शिलान्यास के पूर्व की सम्पूर्ण प्रक्रियाएं अविलम्ब पूरा करने के निर्देश दिए थे। गोरखपुर में प्रस्तावित आयुष विवि को विभाग की प्राथमिकता में रखने के निर्देश देते हुए जनवरी में इसका शिलान्यास की इच्छा जताई थी। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग लखनऊ के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के कार्यालय ने एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट मांगा है। ताकि शिलान्यास होने के ही तत्काल निर्माण कार्य भी शुरू किया जा सके।
मलमलिया में 24.29 हेक्टेयर जमीन पर होगा निर्माण
जिले की चौरीचौरा तहसील के मलमलिया गांव में 24.29 हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर आयुष विभाग के नाम कर दी गई है। जहां निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने फरवरी में ही ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। जिले में एम्स के बाद इस विश्वविद्यालय के बनने से एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी।
पिछले बजट में मिला था 10 करोड़
प्रदेश में आयुष विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये के बजट का भी प्रावधान किया था। इसके खुलने से पूर्वांचल के लोगों को चिकित्सा का एक और बेहतर विकल्प मिल जाएगा।
एक छत के नीचे चिकित्सा के विभिन्न आयाम
आयुष विवि खुलने से एक ही छत के नीचे ही आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य हो सकेगा।
98 आयुष कॉलेज होंगे संबंद्ध
उप्र राज्य आयुष विश्वविद्यालय में प्रदेश के 98 आयुष महाविद्यालयों की संबद्धता की जाएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाविद्यालयों की संबद्धता संबंधी कार्य सत्र 2021-22 में ही पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा है कि अन्य प्रशासनिक कार्य भी इसी सत्र में पूर्ण किया जाए।
औषधीय खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
जिले में आयुष विद्यालय के निर्माण से किसानों को भी काफी फायदा होगा। विश्वविद्यालय की निगरानी में औषधीय खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों के खेत में पैदा होने वाली औषधीय पौधों की बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म तैयार होगा।