गोरखपुर सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे।
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जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और एम्स में दिखाने आने वाले मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। यहां आने वाले मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए अब घंटों लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट (आभा) के तहत शासन ने ड्रीफकेस एप लांच किया है। इस एप की सहायता से पर्चा काउंटर पर चार-छह सेकेंड में पर्चा बन जाएगा। वहीं, अगले कुछ मिनटों में परामर्श भी मिल जाने की उम्मीद है।
जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। शुरुआती दौर में अभी केवल एक ही पटल खोला गया है। जबकि, अन्य पटलों पर पहले की तरह से ही पर्चा बनाया जा रहा है, जिससे कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को कोई परेशानी न हो।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि आभा पटल पर पर्चा बनवाने के लिए मरीज को अपने मोबाइल में एप डाउनलोड करना होगा। इसे आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड करना होगा। अस्पताल के मुख्य द्वार पर आभा का क्यूआर कोड चस्पा रहेगा। एप से स्कैन करते ही एक अकाउंट नंबर मिल जाएगा। पर्चा पटल पर केवल उसी नंबर को बताना होगा। पटल पर तैनात कर्मी वह नंबर डालेगा। इसके बाद मरीज के आधार कार्ड की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इसके बाद से मरीज से केवल बीमारी पूछकर डॉक्टर के बैठने की जगह भरकर तुरंत पर्चा प्रिंट कर मरीज को दे देगा।
आभा के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. मोहित सिंह और जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंबुज ने बताया कि इस एप से जल्द ही पैथालॉजी और आईपीडी को भी जोड़ा जाएगा। एप के जरिये जल्द ही मरीजों को भर्ती और डिस्चार्ज भी किया जाएगा। यह ऐसा एकाउंट नंबर होगा, जिसे देश के किसी भी अस्पताल में बताने पर डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री की जानकारी ले सकेगा।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि सरकार के आभा एप को अभी बड़े अस्पतालों में ही लागू किया गया है। जल्द ही इसे छोटे अस्पतालों में भी लागू किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इस एप के जरिए पर्चा काउंटर पर मरीज को नाम, उम्र, पिता का नाम और पता बताने की जरूरत नहीं होगी। ड्रीफकेस एप पर इसकी पूरी जानकारी होगी।