वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना
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चिड़ियाघर में तैनात महिलाकर्मी के साथ डिप्टी रेंजर द्वारा किया गया गलत आचरण बेहद गंभीर अपराध है। इसकी सजा सिर्फ तबादला ही नहीं हो सकती। ये बातें वन मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने कहीं। सोमवार को अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेकर उन्होंने नाराजगी जताई।
वहीं चिड़ियाघर में नवजात लकड़बग्घे की मौत को भी उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर चिड़ियाघर में सब ठीक नहीं चल रहा है। दोनों मामलों की जांच कराकर 10 दिन में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अमर उजाला से फोन पर बातचीत के दौरान वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने चिड़ियाघर प्रबंधन पर काफी नाराजगी जताई। कहा, चिड़ियाघर के भीतर एक नवजात वन्य जीव की मौत हो जा रही है। लापरवाही को दर्शाने के लिए यह काफी है। कहा कि आखिर ट्रक को भीतर जाने की अनुमति किसने दी? ट्रक वाले को अनुबंध दिया गया होगा कि मिट्टी परिसर में गिरानी है। लेकिन, रात में बिना जिम्मेदारों की मौजूदगी में ट्रक आखिर चिड़ियाघर के अंदर कैसे आया? अंदर ही नहीं, बल्कि वो ब़ाड़े तक भी पहुंच गया। अगले दिन सुबह मिट्टी गिराने वाले बाड़े के बगल में स्थित हाइना के बाड़े में नवजात मृत मिला। अगर समय रहते प्रबंधन की लापरवाहियों पर जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो आगे भी ऐसी घटनाएं होने की आशंका रहेगी।
डिप्टी रेंजर द्वारा महिलाकर्मी के साथ गलत व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चिड़ियाघर मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। यहां तैनात सरकारी कर्मचारी ऐसा व्यवहार करेंगे तो फिर जनता और अधिकारी किसपर विश्वास करेंगे? कहा, बुधवार की सुबह ही शासन स्तर से मामले में एक टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी। ऐसे अपराधों पर सिर्फ तबादला ही पर्याप्त सजा नहीं है।