सूत्रों ने बताया कि वॉल्थर गन की कीमत लगभग दो लाख रुपये है। तस्करी के जरिये इसकी कीमत तीन से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। गोरखपुर में इससे पहले कई वारदातों में 38 बोर के रिवाल्वर, 32 बोर, 9 एमएम, 38 बोर और 30 की अवैध पिस्टल (देसी) के इस्तेमाल का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा कार्बाइन (अवैध देसी) तक से वारदातें हुईं।
छात्रनेता उज्ज्वल यादव के घर पर फायरिंग में प्रयुक्त जर्मनी निर्मित वॉल्थर गन के इस्तेमाल ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। गोरखपुर में पहली बार आपराधिक वारदात में इस गन का इस्तेमाल सामने आया है। पुलिस ने वॉल्थर गन समेत दो अवैध हथियार सीज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों के पास यह गन कैसे पहुंचा।
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सूत्रों ने बताया कि वॉल्थर गन की कीमत लगभग दो लाख रुपये है। तस्करी के जरिये इसकी कीमत तीन से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। गोरखपुर में इससे पहले कई वारदातों में 38 बोर के रिवाल्वर, 32 बोर, 9 एमएम, 38 बोर और 30 की अवैध पिस्टल (देसी) के इस्तेमाल का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा कार्बाइन (अवैध देसी) तक से वारदातें हुईं।
सूत्रों का कहना है कि बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश के इंदौर के पास से ऐसे अवैध देसी गन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। अब पहली बार शहर में जर्मनी निर्मित वॉल्थर गन के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। आशंका है कि इसे तस्करी के जरिये लाया गया होगा। पुलिस और एजेंसियां अब इस नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
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2014 में पहली बार पुलिस ने बरामद की थी अंग्रेजी पिस्टल
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2014 में लालबहादुर हत्याकांड में पुलिस ने माफिया विनोद उपाध्याय की गिरफ्तारी की थी। उस समय एसपी सिटी परेश पांडेय थे। उन्होंने विनोद उपाध्याय की गिरफ्तारी चंपा देवी पार्क के पास की थी।
साथ में पांच और आरोपी पकड़े गए थे। इनमें संतोष सिंह, राकेश यादव, राजेश दूबे, गोल्डी तिवारी, मुकेश शुक्ल शामिल थे। विनोद के पास से अंग्रेजी राइफल (लाइसेंसी) बरामद की गई थी। इसके साथ ही पहली बार पुलिस ने चीन निर्मित इंग्लिश पिस्टल भी बरामद की थी।
माफिया अतीक के बेटे के पास भी बरामद हुई थी वॉल्थर
झांसी के पास अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर (अप्रैल 2023) के दौरान उनके पास से वॉल्थर पी 88 पिस्टल बरामद हुई थी। उनके पास जर्मनी मेड वॉल्थर पी88 के साथ ब्रिटिश बुलडॉग रिवॉल्वर जैसे घातक हथियार मिले थे। इसके अलावा संजीव महेश्वरी (जीवा) की हत्या में भी अंग्रेजी पिस्टल (मैग्नम अल्फा रिवाल्वर) का इस्तेमाल किया गया था।
लालबहादुर और छोटू सिंह की हत्या कार्बाइन से हुई थी
शहर में 10 नवंबर 2013 को शिवपुर सहबाजगंज निवासी बिजेंद्र सिंह उर्फ छोटू सिंह की कार्बाइन और पिस्टल से गोली मारकर फिल्मी अंदाज में हत्या की गई थी। इसके अलावा माफिया लालबहादुर यादव की हत्या भी कार्बाइन से फायरिंग कर की गई थी।
खाली खोखों को दोबारा घटनास्थल पर रख लिए गए नमूने
सूत्रों के मुताबिक, छात्रनेता के घर पर फायरिंग के बाद सबसे पहले फॉरेसिंक विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने खाली खोखों को एकत्र कर लिया। थोड़ी देर बाद पुलिस पहुंची तो फिर से इन खाली खोखों को घटनास्थल पर रखा गया।
पुलिस ने भी साक्ष्य के तौर पर इन खोखों के नमूने लिए। फॉरेंसिक विभाग की टीम ने खाली खोखों को अनुसंधान के लिए भेज दिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से देसी और विदेशी दोनों असलहों को बरामद कर लिए।