क्या है फरुवाही नृत्य
फरुवाही कलाकार रामज्ञान यादव ने बताया कि फरुवाही नृत्य भगवान श्रीकृष्ण द्वारा किया जाता था। इसीलिए इस नृत्य को द्वापर युग में कन्हैया नृत्य कहा जाता था। लगभग पांच हजार वर्षों से भी अधिक पुराने इस लोकनृत्य को विशेष वेशभूषा के चलते जांघिया नृत्य भी कहते हैं। नर्तकों द्वारा अलग अंदाज में उछल-कूद कर नाचने से हो फर्री नृत्य रूप में भी इसे पहचान मिली। वर्तमान में इसे फर नृत्य कहते हैं।
यही लोकनृत्य आज के नौटंकी नृत्य, कहरउवा नृत्य, चमरउवा नृत्य, धोबियउवा नृत्य की उत्पत्ति का स्रोत है। वर्तमान में इसे फरुवाही नृत्य कहते हैं। पंजाब की लोकप्रिय लोकनृत्य भांगड़ा भी इसी नृत्य से प्रभावित है। रोमांचकारी और जोशीले इस लोक नृत्य को देखने मात्र से ही शरीर में रोमांच भर जाता है।
इसे भी पढ़ें: एमपी शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह में बोले CM योगी, पंच प्रण ही विकसित भारत की राह