गोरखपुर। जंगल से रेस्क्यू कर लाए गए पांच बाघों की अब जिंदगी गोरखपुर चिड़ियाघर में ही कटेगी। मानव-वन्यजीव संघर्ष में शामिल होने के कारण इन्हें दोबारा जंगल में नहीं छोड़ने का फैसला लिया गया है। फिलहाल सभी बाघों को चिड़ियाघर के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। व्यवहार शांत और सामान्य होने के बाद इन्हें एक-एक कर चिड़ियाघर के बाड़ों में छोड़ा जाएगा। इन पांच बाघों में तीन मादा और दो नर हैं।
वन विभाग की ओर से वर्ष 2025 से इस साल तक लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बहराइच से इन बाघों को अलग-अलग परिस्थितियों में रेस्क्यू कर लाया गया है। मानव आबादी के आसपास लगातार सक्रिय रहने और लोगों के लिए खतरा बनने की आशंका के चलते इन्हें जंगल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। विशेषज्ञों की निगरानी में इनका व्यवहार देखा जा रहा है। सितंबर 2025 में सीतापुर से करीब आठ साल की बाघिन को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया था। इसके बाद अक्तूबर 2025 में उसकी करीब दो साल की शावक को भी रेस्क्यू किया गया। दोनों को अलग-अलग सेल में निगरानी में रखा गया। नवंबर 2025 में लखीमपुर खीरी से करीब नौ साल की एक बाघिन को रेस्क्यू कर लाया गया। यह भी मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी स्थिति के बाद पकड़ी गई थी। फिलहाल इसे रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है। इसकी गतिविधियों और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बहराइच और लखीमपुर से दो नर बाघ आए
जनवरी 2026 में बहराइच से करीब सात साल के नर बाघ को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया गया। इसके बाद अप्रैल में लखीमपुर खीरी से करीब पांच साल के एक और नर बाघ को रेस्क्यू किया गया। दोनों को भी फिलहाल रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है।
शांत हो रहा व्यवहार
रेस्क्यू सेंटर में रखे गए सभी पांचों बाघों (नर-मादा) का व्यवहार अब धीरे-धीरे शांत हो रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में इनके स्वास्थ्य व गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सभी बाघ नियमित रूप से अपनी पूरी खुराक ले रहे हैं। उनकी स्थिति सामान्य रहने पर आगे चरणबद्ध तरीके से बाड़ों में स्थानांतरित किया जाएगा।
चिड़ियाघर में पहले से हैं दो बाघ
रेस्क्यू सेंटर में रखे गए पांच बाघों के अलावा चिड़ियाघर के मुख्य बाड़े में वर्तमान में केवल दो बाघ हैं। इसमें नर बाघ अमर और सफेद बाघिन गीता शामिल है। ऐसे में आने वाले समय में रेस्क्यू किए गए बाघों को चरणबद्ध तरीके से मुख्य बाड़ों में रखने की तैयारी है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में शामिल बाघों को दोबारा उसी क्षेत्र में छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे बाघों के व्यवहार में मानव आबादी के प्रति असामान्य निर्भीकता विकसित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि इन पांचों बाघों को अब चिड़ियाघर में ही सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
- डॉ. योगेश प्रताप सिंह, उप निदेशक, चिड़ियाघर