बाजार में अवैध सोने का काम करने वाले और मछली के धंधेबाजों की जुगल जोड़ी अब शहर के कई धंधेबाजों के कालेधन को खपा रही है। सूत्रों ने बताया कि इन धंधेबाजों का नेटवर्क आस-पास के प्रदेश में काफी फैला हुआ है। बिहार के एक व्यापारी का हवाला के रुपये अभी कुछ दिनों पहले पकड़े गए थे। इसे पैरवी कर शहर के धंधेबाज ने समझौता करवाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूत्रों ने बताया कि हिंदी बाजार में अवैध सोने की खरीद बिक्री होने के बाद ही एजेंसी और एलआईयू जागती है, इसी वजह से यह धंधा खूब फल फूल रहा है।
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जांच एजेंसी से बच जाती है अवैध खेप
सूत्रों ने बताया कि बैंकॉक से अवैध सोने की खेप कोलकाता तक आती है। इसी खेप को मछली के कंटेनरों के नीचे छिपा दिया जाता। इसका फायदा होता है कि मछली के कंटेनर में आने वाली आपूर्ति फर्म अपने नाम पर करती है। इसमें सभी नियमों और शुल्क का भुगतान करने के बाद सेंटर से छोड़ा जाता। ऐसे में अगर कभी एजेंसियां संदिग्ध ट्रक को रोक कर उसके कंटेनर की जांच की और उसमें अवैध कुछ नहीं मिला तो विभागीय जिम्मेदारी और नुकसान एजेंसियों के मत्थे पड़ जाता है। धंधेबाज इसी का फायदा उठाकर अब आराम से हवाला और अवैध सोने का काम कर रहे।
पिछले साल बीएसएफ ने की कार्रवाई
छह मार्च को वेस्ट बंगाल में सीमा के पास एक तालाब से बीएसएफ जवानों ने 2.68 करोड़ मूल्य के 40 सोने के बिस्कुट जब्त किए थे। इसी तरह नौ मार्च को इसी जिले से 1.43 करोड़ के 23 सोने के बिस्कुटों की जब्ती के अलावा तीन मार्च को 1.44 करोड़ के 22 बिस्कुटों के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया था। सूत्रों ने बताया कि बैंकॉक से आए इस सोने को दिल्ली, लखनऊ और गोरखपुर समेत अन्य दूसरी बड़ी मंडी में खपाने की तैयारी थी।
सराफा में है हवाला और सोना तस्करी का नेटवर्क
सराफा बाजार में भी हवाला और सोना तस्करी का सटीक नेटवर्क है। यह नेटवर्क हवाला के अवैध धन को बड़े लाभ से छोटे व्यापारियों में सूद पर चलाता है। इसके अलावा सोने की तस्करी से अर्जित धन भी सूद में लगाया जाता है।