– गुरु गोरक्षनाथ घाट और रामघाट के निर्माण पर खर्च हुए हैं करोड़ों रुपये
– नगर निगम और सिंचाई विभाग में मची है खींचतान, नहीं हो पा रहा हस्तानांतरण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राजघाट पुल के पास राप्ती नदी के दोनों ओर बने गुरु गोरखनाथ घाट और रामघाट की रौनक खत्म होने लगी है। करीब ढाई साल पहले बने इन दोनों घाटों की सुंदरता देखने के लिए भीड़ लगती थी लेकिन आज कचरा फैला हुआ है। योजना थी कि अयोध्या की तर्ज पर घाट को विकसित किया जाएगा। रोपवे, मंगल आरती के साथ योग व मांगलिक कार्यक्रमों के लिए इसे विकसित किया जाएगा, लेकिन जिम्मेदारों ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। दो विभागों की लड़ाई में घाट की साफ सफाई नहीं हो पा रही है।
समुचित देखरेख के अभाव में घाट पर हुए निर्माण भी कबाड़ होने लगे हैं। इससे पर्यटक तो आते नहीं, स्थानीय लोग भी आने से हिचकने लगे हैं। बस यह स्मैकियों और आवारागर्दी का अड्डा बनकर रह गया है। लोगों का कहना है कि यदि घाटों के रखरखाव पर ध्यान दिया जाए और बाकी योजनाएं पूरी हो जाएं तो यह पर्यटकों के लिए बेहद खूबसूरत जगह बन जाएगी।
16 फरवरी 2021 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने भव्य कार्यक्रम के बीच राप्ती नदी के गोरखनाथ घाट और श्रीरामघाट का शुभारंभ किया था। इन दोनों घाटों को सजाने और बनाने में राजस्थान के लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। राजस्थानी शैली की स्थापत्य कला लोगों को लुभाती हैं। यहां पर बगल में ही 12 करोड़ की लागत से अंत्येष्टि स्थल बना है। लकड़ी और गैसीफायर की व्यवस्था की गई है। शुरुआत में दोनों घाटों का आकर्षण लोगों को लुभाता था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी रौनक गायब हो रही है।
हार्बर्ट बंधे से नीचे उतरकर घाट पर जाने वाले रास्ते पर नगर निगम की ओर से बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखे अधिकांश शब्द गायब हो चुके हैं। साफ-सफाई के अभाव में गेट पर प्रतिमा से लेकर दीवार तक गंदगी पसरी रहती है। परिसर में दो स्नानगृह बने हुए हैं। शनिवार को इसमें बाहर की ओर लगा पानी का नल सूखा मिला। एक स्नानघर में ताला बंद था तो दूसरे में गंदगी का अंबार और बिजली के तार बिखरे हुए मिले। इसके आगे पूरे परिसर में जगह-जगह कूड़ा फैला मिला। पीपल के पेड़ पर बने चबूतरे में झाड़-झंखाड़ और घासें फैली हुई थीं। नदी के किनारे जाने पर घाट की सीढ़ियां गंदगी से पटी मिलीं।
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कुत्ते, गायों और सांड से होता है सामना
घाट के किनारे कैंटीन बनी हैं। इसमें दो-तीन लोग बैठे हुए थे। उन लोगों ने बताया कि दिनभर घाट पर कुत्ते, गाय और सांड घूमते रहते हैं। दोपहर और शाम को स्मैकिया आ जाते हैं। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को असुविधा होती है। यहां पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इसलिए अगल-बगल में रहने वाले लोगों के बच्चे भीख मांगकर लोगों को परेशान करते हैं। युवकों ने बताया कि बाढ़ का सीजन होने की वजह से बोट नहीं चल रही है।
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कपड़े बदलने वाली जगह पर गंदगी, बैठती हैं गाय
घाट के किनारे नहाने वाले लोगों के कपड़े बदलने के लिए दो कमरे बने हुए हैं। इनमें एक कमरे में ताला बंद था तो दूसरे में गाय बैठी मिली। वहां किसी के अंतिम संस्कार में आए रमेश कुमार ने बताया कि हम लोगों को लगा कि घाट बड़ा सुंदर होगा। लेकिन यहां आने पर लगा कि बेवजह इतना पैसा खर्च किया गया है।
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घाट की सीढ़ियों को बनाया पीकदान
राप्ती नदी के पश्चिम तरफ श्रीरामघाट है। यहां पर भी लोगों के बैठने के लिए व्यवस्था की गई है। यहां पर भी कपड़े बदलने के लिए कमरे बने हुए हैं। इनमें कुछ साफ-सफाई थी, लेकिन सीढ़ियों से लेकर पूरा फर्श तक पीकदान बना हुआ है। यहां जाने पर ऐसा लगा कि लोग सिर्फ पान खाकर थूकने आते हैं। घाट की सीढ़ियों पर आने वाले प्लेटफाॅर्म पर पांच-छह बाइक सवार युवक गपशप मारते मिले। दीवारों के कोने में एक प्रेमी जोड़ा आपस में बात कर रहा था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि सुनसान होने के चलते दिन भर जोड़े ही आते हैं। गंदगी के कारण लोग यहां आने से बचने लगे हैं। यहां दीवार पर शादी समारोह, जन्मदिन, अन्य किसी मांगलिक कार्यक्रम के लिए संपर्क करने का बोर्ड लगा हुआ है। हालांकि स्थानीय लोगों के मुताबिक आरती के अलावा कोई अन्य कार्यक्रम नहीं हुआ है।
इन योजनाओं पर लगा ग्रहण
गुरु गोरखनाथ घाट और श्रीराम घाट बनने के बाद रामघाट तक रोपवे बनाने की तैयारी हुई थी। इसके अलावा आधुनिक नावों को चलाने और हॉट एयर बैलून का संचालन करने की योजना भी अधिकारियों ने बनाई थी। शादी-विवाह, खानपान महोत्सव, प्रदर्शनी, योग शिविर आदि लगाकर इसकी महत्ता बढ़ाने की तैयारी हुई। इक्का दुक्का कार्यक्रमों को छोड़ दें तो यहां पर बसंतपुर श्रीराम चौक के पूर्व पार्षद संजय श्रीवास्तव की अगुवाई में एक टीम हर मंगलवार को राप्ती आरती करती है। इसके अलावा किसी और बड़े कार्यक्रम के लिए लोग नहीं आ रहे हैं।
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दोनों घाटों का हस्तानांतरण नगर निगम को किया जाना है। लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आधा दर्जन से अधिक बार पत्राचार किया जा चुका है। नगर निगम के पास संसाधन हैं। इसलिए उनकी ओर से ही साफ सफाई की व्यवस्था कराई जा सकती है।
दिनेश सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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इस संबंध में अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रक्रिया पूरी होने पर व्यवस्था में कमी नहीं रहेगी। हालांकि लोगों के आवागमन को देखते हुए नगर निगम के सफाई कर्मचारियों वहां भेजकर साफ सफाई कराई जाती है।
गौरव सिंह सोगरवाल, नगर आयुक्त