घर में सबसे बड़ी होने के कारण सोनी ने खुद कुछ करने की ठान ली। सोनी ने बताया कि लॉकडाउन के एक सप्ताह बाद प्रशासन ने मास्क लगाने की कड़ाई की। जिससे मास्क की मांग बढ़ने लगी।
पहले दिन चार या पाच मास्क बनाया और भाई ने उसे सस्ते दामों पर बेचा तो कुछ पैसे आसानी से आ गए। अब इस काम में दस साल का भाई भी मदद करता है। पहले दिन के बाद अब प्रतिदिन 50 मास्क तैयार हो जाता है।
करीब प्रत्येक दिन 20 मास्क की बिक्री हो जाती है। एक मास्क को 15 रुपये में बेचा जाता है। अगर कोई जरूरतमंद आ जाता है तो उसे मुफ्त में भी दिया जाता है।
भुवनी गांव के ग्राम प्रधान वकील उपाध्याय ने बताया कि सोनी द्वारा बनाए मास्क की मांग ज्यादा है। उससे मिली रकम से उसका घर चलता है। साथ ही मास्क पहनकर लोग सुरक्षित भी हैं।