बुधवार का बाजार आज भी फरेंदा के लिए चर्चित बाजारो में सुमार किया जाता है। 1970 के बाद चौरहिया गोला की देखभाल कस्बे के मूलचंद व ओमप्रकाश उर्फ लल्ला गल्ला वाले देखते थे। मंडी समिति का निर्माण तो करीब 1976 में होने के बाद भी चावल की मंडी चौरहिया गोला में ही लगती थी। बाद में काफी प्रयास के बाद 1990 के करीब चावल की मंडी को गल्ला मंडी समिति में स्थानान्तरित किया गया।
फरेंदा में वर्तमान में भी चावल, सब्जी व गुड़ की बड़ी मंडी बुधवार को लगती है। जहां पर कई जिले के लोग पहुंचते हैं। मूलचंद ने बताया कि चावल की बड़ी मंडी लगने के कारण वार्ड का नाम भी चौरहिया गोला के नाम से जाना जाने लगा।
नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश जायसवाल ने कहा कि चौरहिया गोला चावल की मंडी के लिए मशहूर हुआ करता था। गुजरे वक्त एवं वर्तमान में बहुत अंतर हो गया है।