उनवल। परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे अंडा-बिरयानी विक्रेता अर्जुन यादव (46) की अचानक मौत से घर का सहारा छिन गया। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर लाया गया तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटे का शव देखकर बूढ़ी मां बेसुध हो गईं, जबकि तीनों बेटियां मुस्कान, पायल और तीन वर्षीय बेटी पिता को खोने के गम में रोती रहीं। परिवार के सामने अब अपनों को खोने के दुख के साथ ही रोजमर्रा का खर्च चलाने और बेटियों के भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है।
करीब 20 वर्ष पहले पिता सतई के निधन के बाद अर्जुन ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभाली थी। अंडा-बिरयानी की दुकान चलाकर वह घर का खर्च चलाते थे। उनकी पहली पत्नी का करीब 10 वर्ष पहले निधन हो गया था। पहली पत्नी से दो बेटियां मुस्कान, पायल हैं। बाद में तीन साल बाद अर्जुन ने दूसरी शादी सरोज से की थी, जिससे तीन वर्ष की एक बेटी है। दूसरी पत्नी सरोज अधिकतर मायके में रहती हैं।
दुकानदार की बुजुर्ग मां के मुताबिक, मृतक परिवार का प्रमुख कमाने वाला सदस्य था। उसकी आय से ही घर की जरूरतें पूरी होती थीं। अचानक उसके चले जाने से बूढ़ी मां और पत्नी सरोज के सामने परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं तीनों बेटियों की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। बुधवार को शव घर पहुंचा तो आंगन में मातम छा गया। मां और बेटियों का विलाप सुनकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों ने परिवार को ढांढस बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस व्यक्ति की कमाई से परिवार का चूल्हा जलता था।