तारामंडल, गुलरिहा, पैडलेगंज इलाके में कई ऐसे बीएएमएस मिल जाएंगे, जो न केवल एलोपैथ पद्धति से इलाज कर रहे, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए ट्रॉमा सेंटर, न्यूरो, बर्न यूनिट, आईसीयू व स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भी चला रहे हैं। यहीं नहीं यहां बड़े ऑपरेशन और डायलिसिस तक की सुविधा इन अस्पतालों में मौजूद है। तारामंडल क्षेत्र तो ऐसे अस्पतालों का हब बन गया है।
पैडलेगंज में तो जूता पालिश और हाईस्कूल फेल होने वाला व्यक्ति भी अस्पताल का संचालक बन बैठा है। इन अस्पतालों में नामी डॉक्टरों के नाम के बोर्ड भी लगाए गए हैं। जबकि, ये उन अस्पतालों में इलाज के लिए जाते भी नहीं हैं। कई डॉक्टरों के नाम ऐसे हैं, जो रहते लखनऊ में हैं, लेकिन उनके नाम का बोर्ड तारामंडल इलाके के कई अस्पतालों में दिख जाएगा।
एंबुलेंस चालक निजी अस्पतालों को बेच रहे मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास एंबुलेंस चालकों का हब है। यहीं से पूरा खेल खेला जा रहा है। एंबुलेंस चालक बीआरडी में आने वाले मरीजों को अच्छे इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों के हाथों बेच दे रहे हैं। एक मरीज के बदले 10 से 20 हजार रुपये लेते हैं। अगर सर्जरी की बात आती है तो यह रकम 20 से 25 हजार के आसपास हो जाती है। सबसे अधिक शिकार बिहार और आसपास के जिलों के मरीजों को बनाते हैं।
अस्पताल पंजीकरण नोडल अधिकारी डॉ. एके सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग बिना पंजीकरण चल रहे अस्पतालों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक 86 ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कई मामलों में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ अभियान भी चलाया जाएगा।