सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि जिस अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति का इलाज चल रहा था। वह न तो पंजीकृत था न ही कोरोना मरीजों के उपचार के लिए अनुमति दी गई थी। अस्पताल में संक्रमण रोकने के कोई उपाय भी नहीं मिले हैं। इसकी वजह से बुद्धा हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल के मैनेजर अखिलेश कुमार के खिलाफ कोविड-19 के महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए कैंट थाने में तहरीर भी दी गई है।
वहीं इंस्पेक्टर रवि राय ने बताया कि संचालक के खिलाफ सीएमओ की तहरीर पर महामारी अधिनियम समेत कई आरोपो में केस दर्ज कर लिया गया है।
बोर्ड तोड़कर फेंका और शटर बंद कर हुआ फरार
झोलाछाप को जैसे ही जानकारी हुई कि स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचने वाली है, वैसे ही उसने अपना बोर्ड तोड़ दिया और शटर बंद कर फरार हो गया। इस बीच उसके नौ स्टाफ तो भाग गए, लेकिन एक स्टाफ पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की पकड़ में आ गया। उसने बताया कि एक और मरीज था, जिसका ऑपरेशन किया गया था। कोरोना पॉजिटिव मिले मरीज का भी पेट का ऑपरेशन करने की योजना बन रही थी। आपरेशन होता, इससे पहले वह कोरोना पॉजिटिव निकल गया।
कोरोना रिपोर्ट आने से पहले शटर वाले बुद्धा हॉस्पिटल में संचालक के साढ़ू के ऑपरेशन की तैयारी चल रही थी। इससे पहले ही रिपोर्ट आ गई। कोरोना पॉजिटिव भी अस्पताल से भाग निकला है। बताया जाता है कि उसके पास एक न्यूज चैनल की आईडी भी है, जिसकी बदौलत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उसे तरजीह देते हैं।
सांसत में फंस गए 350 परिवार
झोलाछाप की लापरवाही के चक्कर में कूड़ाघाट के पीपलडाड़ा के रहने वाले 350 से अधिक परिवार सांसत में पड़ गए हैं। मोहल्ला पूरी तरह से सील कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम शुक्रवार को मोहल्ले का सर्वे करेगी।
बृहस्पतिवार को डॉ शालिनी श्रीवास्तव, फार्मास्टिस सुशील कुमार सिंह पूरी टीम के साथ पहुंचे थे। टीम ने ही झोलाझाप के एक स्टाफ को पकड़ा भी था। इसके अलावा सदर एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल ने पुलिस टीम के साथ पहुंचकर मोहल्ले को सील कराया है। इसके अलावा जहां झोलाछाप का क्लीनिक चलता था। उसके ऊपर करीब 15 लोग किरायेदार है। उनका भी नमूना जांच के लिए शुक्रवार को भेजा जाएगा।